
Dhanraj Nathwani: उत्तर प्रदेश की आगामी राज्यसभा चुनावी तस्वीर में समाजवादी पार्टी ने धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाकर सियासी हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। सपा ने वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव के साथ धनराज नथवानी को अपना प्रत्याशी बनाया है। दोनों ने बुधवार को लखनऊ में अखिलेश यादव की मौजूदगी में नामांकन भी दाखिल कर दिया।धनराज नथवानी की उम्मीदवारी इसलिए भी सुर्खियों में है, क्योंकि उनके पिता परिमल नथवानी पहले से राज्यसभा के सदस्य हैं और जून 2026 में झारखंड से एक बार फिर उच्च सदन पहुंचे हैं। उनका चुनाव भाजपा के नेतृत्व वाले NDA के समर्थन से हुआ था। ऐसे में अगर धनराज नथवानी भी राज्यसभा पहुंचते हैं, तो पिता और पुत्र अलग-अलग राजनीतिक दलों से उच्च सदन में मौजूद होंगे।
धनराज नथवानी कौन हैं और सपा ने क्यों चुना
धनराज नथवानी लंबे समय से रिलायंस समूह से जुड़े हुए हैं। वे समूह में वरिष्ठ जिम्मेदारी संभालते हैं और गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं। उनके पेशेवर काम का दायरा कॉरपोरेट प्रबंधन के साथ खेल प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं तक फैला हुआ है।धनराज की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की है। उन्होंने लंदन से इंटरनेशनल बिजनेस की पढ़ाई की है। सपा में उनकी एंट्री पारंपरिक पार्टी राजनीति से अलग कॉरपोरेट और प्रशासनिक अनुभव वाले चेहरे के तौर पर हुई है। अखिलेश यादव ने भी उनके चयन को नए और अलग तरह के प्रतिनिधित्व से जोड़ते हुए पार्टी के कॉरपोरेट जगत से संवाद की बात कही है।
पिता परिमल नथवानी की राजनीतिक यात्रा भी रही है अलग
धनराज के पिता परिमल नथवानी रिलायंस समूह से लंबे समय से जुड़े रहे हैं और कई वर्षों से राज्यसभा की राजनीति में सक्रिय हैं। वे 2008 में पहली बार झारखंड से राज्यसभा पहुंचे थे। इसके बाद 2020 में आंध्र प्रदेश से वाईएसआर कांग्रेस के समर्थन से उनका कार्यकाल आगे बढ़ा और जून 2026 में झारखंड से उन्हें फिर उच्च सदन में भेजा गया। इस बार उन्हें NDA का समर्थन मिला था।यही राजनीतिक पृष्ठभूमि धनराज की सपा उम्मीदवारी को और चर्चा में ला रही है। एक ही परिवार के दो सदस्य अलग-अलग राजनीतिक खेमों से राज्यसभा तक पहुंचने की स्थिति में होंगे।
सपा के लिए धनराज का चयन क्यों अहम माना जा रहा है
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है। मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर भाजपा नेतृत्व वाला गठबंधन आठ सीटों पर अपनी स्थिति मजबूत रखता है, जबकि सपा और कांग्रेस के मौजूदा आंकड़े दो सीटों के लिए पर्याप्त माने जा रहे हैं। हालांकि अतिरिक्त उम्मीदवार आने की स्थिति में मुकाबले के समीकरण बदल सकते हैं।अखिलेश यादव ने धनराज को उम्मीदवार बनाकर यह संकेत भी दिया है कि पार्टी का फोकस केवल पारंपरिक राजनीतिक चेहरों तक सीमित नहीं है। उनके कॉरपोरेट अनुभव और खेल प्रशासन से जुड़े काम को भी सपा की नई पसंद के संदर्भ में देखा जा रहा है।
अंबानी परिवार से कनेक्शन की चर्चा क्यों हो रही है
धनराज नथवानी का रिलायंस समूह से जुड़ाव उनकी उम्मीदवारी के साथ सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले पहलुओं में से एक है। मीडिया रिपोर्टों में उन्हें रिलायंस चेयरमैन मुकेश अंबानी के करीबी सहयोगी के तौर पर भी बताया गया है। हालांकि, इस तरह के व्यक्तिगत संबंधों से जुड़ी राजनीतिक व्याख्याओं को तथ्य से अलग रखना जरूरी है।सपा की ओर से उनकी उम्मीदवारी के पीछे किसी विशेष कारोबारी या राजनीतिक सौदे का आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए टिकट को लेकर चल रही अलग-अलग राजनीतिक चर्चाओं को फिलहाल दावे और अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
राज्यसभा में दिखेगी पिता और पुत्र की अलग राजनीतिक पहचान
अगर चुनाव के बाद धनराज नथवानी राज्यसभा सदस्य बनते हैं, तो उनके पिता परिमल नथवानी के साथ उनकी मौजूदगी सदन में एक असामान्य पारिवारिक राजनीतिक स्थिति बनाएगी। पिता NDA समर्थित निर्दलीय सांसद के तौर पर उच्च सदन में हैं, जबकि बेटा सपा के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में है।यह स्थिति इसलिए भी दिलचस्प होगी क्योंकि दोनों एक ही सदन में रहते हुए अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ जुड़े होंगे। हालांकि धनराज की राज्यसभा सदस्यता अभी चुनाव परिणाम पर निर्भर है और 16 अक्टूबर का मतदान इस तस्वीर को अंतिम रूप देगा।




















