अंबिकापुर: राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अंबिकापुर के भूगोल विभाग में ओजोन दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों के साथ परिचर्चा आयोजित की गई। इस वर्ष की थीम Global Action, Cooler Planet” पर चर्चा करते हुए ओजोन परत के महत्व, उसके क्षरण के कारणों, संरक्षण के उपायों और पर्यावरण संरक्षण में व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर विचार साझा किए गए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर अनिल कुमार सिन्हा ने की। उन्होंने ओजोन परत की संरचना, महत्व और संरक्षण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बढ़ती आवश्यकताओं और उपभोग की प्रवृत्ति ने पर्यावरण पर दबाव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, लेकिन प्रकृति की कीमत पर किया गया विकास भविष्य में मानव समाज के लिए संकट पैदा कर सकता है।

सिन्हा ने विद्यार्थियों से ऊर्जा संरक्षण, संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि ओजोन की रक्षा केवल वातावरण की एक परत की सुरक्षा नहीं, बल्कि पृथ्वी पर जीवन की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों को ओजोन संरक्षण की शपथ भी दिलाई।

भूगोल विभाग की प्राध्यापक दीपिका स्वर्णकार ने इस वर्ष की थीम के संदर्भ में Cool Responsibly, Consume Wisely, Act Collectively” पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ओजोन परत पृथ्वी और मानव जीवन के लिए सुरक्षा कवच की तरह है। उन्होंने बढ़ती जनसंख्या, आवश्यकताओं और अनियंत्रित उपभोग को पर्यावरणीय दबाव के प्रमुख कारणों में शामिल करते हुए कम और विवेकपूर्ण उपभोग तथा सामूहिक कार्रवाई को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की बात कही।

प्राध्यापक ओमकार कुशवाहा ने ओजोन संरक्षण के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों की जानकारी देते हुए Montreal Protocol के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 16 सितंबर 1987 को देशों ने ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों के उत्पादन और उपयोग को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के उद्देश्य से मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल अपनाया था। उन्होंने पर्यावरण-अनुकूल उपकरणों के उपयोग, रेफ्रिजरेंट गैस के रिसाव को रोकने, बिजली की बचत, पौधरोपण और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की अपील की।

परिचर्चा में एम.ए. भूगोल के छात्र विवेकानंद ने ओजोन परत की संरचना और विशेषताओं पर जानकारी दी। छात्रा उर्मिला ने ओजोन संरक्षण का संदेश घरों और गांवों तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई। छात्र विकास ने मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी, जबकि छात्रा काजल सोनी ने Kigali Amendment और उसके प्रमुख प्रावधानों पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने ओजोन मित्र’ बनने का संकल्प लिया। इसके प्रतीकात्मक रूप में महाविद्यालय परिसर में पौधरोपण भी किया गया। विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत अपने घर, महाविद्यालय और समुदाय से करने तथा व्यक्तिगत प्रयासों को सामूहिक अभियान में बदलने का संकल्प लिया।कार्यक्रम में लैब तकनीशियन उमेश भगत सहित एम.ए. भूगोल के विद्यार्थी उपस्थित रहे। संचालन एक वर्षीय स्नातकोत्तर कार्यक्रम की छात्रा काजल सोनी ने किया तथा आभार प्रदर्शन पूर्णिमा सिंह ने किया। परिचर्चा का संदेश रहा कि वैश्विक पर्यावरणीय प्रयासों को प्रभावी बनाने के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदारी और सामूहिक भागीदारी आवश्यक है।

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