कोरबा: छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कोरबा प्रवास के दौरान प्रदेश सरकार और स्थानीय मंत्री लखनलाल देवांगन को लेकर तीखे राजनीतिक आरोप लगाए। मीडिया से बातचीत में महंत ने रेत खदानों, कोयला कारोबार और कथित राजनीतिक संरक्षण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कंबल ओढ़कर कैसे घी पीते हैं” उन्होंने आरोप लगाया कि रेत और कोयले से जुड़े कई काम मंत्री की अनुशंसा से संचालित हो रहे हैं। उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट में भी उनके इसी बयान का उल्लेख है।

महंत ने कहा कि कोरबा में रेत खदानों के आवंटन और कोयला कारोबार को लेकर स्थिति स्पष्ट है। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि “कोयले के दलालों का नाम खोजो तो पता लग जाएगा” और दावा किया कि “सब मंत्रीजी की अनुशंसा से चल रहा है।” हालांकि, ये आरोप महंत के राजनीतिक बयान हैं और इनके संबंध में स्वतंत्र रूप से कोई प्रशासनिक पुष्टि सामने नहीं आई है।नेता प्रतिपक्ष ने प्रशासनिक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में ऐसा माहौल बनाया गया है, जहां सरकार के खिलाफ बोलने वालों में कार्रवाई का भय बना रहता है।महंत ने कथित अवैध कारोबार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को लेकर भी गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि कोई ऐसे लोगों के नाम सामने लाने या उनके खिलाफ बोलने की कोशिश करता है तो उसके बाल-बच्चे तक अंदर चले जाएंगे।” उन्होंने इसे सरकार द्वारा बनाए गए कथित दबाव और भय के माहौल से जोड़कर प्रस्तुत किया।

बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर सवाल

महंत ने अधिकारियों पर कार्रवाई के तरीके को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पटवारी, क्लर्क, शिक्षक और सिपाही जैसे कर्मचारियों को निलंबित किया जाता है, लेकिन एसपी, कलेक्टर और डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारियों पर उसी तरह की कार्रवाई नहीं होती।उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि उच्चाधिकारियों को सस्पेंड नहीं करेंगे, ये सब आप भी देख रहे हैं।”

मंत्री के राजनीतिक भविष्य पर भी टिप्पणी

मीडिया से बातचीत के दौरान महंत ने स्थानीय मंत्री के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि मंत्री जी का भविष्य उज्ज्वल है।” उन्होंने सीधे नाम लेने के बजाय “आपके यहां के मंत्रीजी” का उल्लेख किया, जिसे कोरबा विधायक एवं मंत्री लखनलाल देवांगन से जोड़कर देखा जा रहा है।

महंत के बयानों के बाद कोरबा में रेत खनन, कोयला कारोबार, प्रशासनिक जवाबदेही और कथित राजनीतिक संरक्षण को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रदेश की राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार जारी हैं।

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