रायपुर। छत्तीसगढ़ में कृषि को अधिक लाभकारी और विविधतापूर्ण बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार नई पहल कर रही है। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम के नेतृत्व में संचालित किसान हितैषी योजनाओं के चलते पारंपरिक फसलों के साथ उद्यानिकी और मसाला फसलों की खेती को भी बढ़ावा मिल रहा है। इसका असर अब किसानों की खेती के तौर-तरीकों में भी दिखाई देने लगा है।

प्रदेश के किसान साग-सब्जी और फल उत्पादन के साथ अब हल्दी जैसी मसाला फसलों की ओर भी आकर्षित हो रहे हैं। इससे जहां खेती में फसल विविधता बढ़ रही है, वहीं किसानों के सामने अतिरिक्त आय अर्जित करने के नए विकल्प भी तैयार हो रहे हैं।

1300 हेक्टेयर में हल्दी उत्पादन का लक्ष्य

वर्ष 2026-27 में राज्य पोषित मद के अंतर्गत मसाला क्षेत्र विस्तार प्रोत्साहन योजना संचालित की जा रही है। उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी विभाग ने योजना के तहत हल्दी के रकबे को बढ़ाने के लिए 1300 हेक्टेयर का लक्ष्य तय किया है। इस योजना के लिए सरकार ने 620 लाख रुपये यानी 6.20 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है।

योजना का उद्देश्य किसानों को मसाला फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना और पारंपरिक खेती पर निर्भरता को कम करते हुए फसल विविधीकरण को गति देना है।

पारंपरिक फसलों के साथ मिलेगा कमाई का नया विकल्प

हल्दी की खेती को प्रोत्साहन मिलने से किसानों के पास अपनी कृषि आय बढ़ाने का एक अतिरिक्त रास्ता उपलब्ध होगा। मसाला फसलों की बाजार में मांग होने के कारण इनके उत्पादन का विस्तार किसानों के लिए आर्थिक रूप से उपयोगी साबित हो सकता है।

वहीं, प्रदेश में हल्दी सहित अन्य मसाला फसलों का उत्पादन बढ़ने से स्थानीय स्तर पर कच्चे माल की उपलब्धता भी मजबूत होगी। इसका लाभ मसाला प्रसंस्करण और इससे जुड़े उद्योगों को मिलने की संभावना है।

हल्दी बीज को लेकर विभाग ने साफ की स्थिति

हल्दी बीज की आपूर्ति को लेकर सामने आ रही भ्रामक जानकारियों पर उद्यानिकी विभाग ने स्थिति स्पष्ट की है। विभाग के अनुसार संचालनालय या जिला स्तर से किसानों को हल्दी बीज की सीधी आपूर्ति नहीं की जाती है।

छत्तीसगढ़ शासन के कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार किसानों को योजना का लाभ प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से दिया जाता है।

इसके लिए किसान द्वारा खरीदे गए बीज के बिल, संबंधित दस्तावेज और फसल का भौतिक सत्यापन किया जाता है। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र किसानों को अनुदान की राशि उनके बैंक खातों में भेजी जाती है।

बीज की गुणवत्ता को लेकर भी विभाग का स्पष्टीकरण

विभाग ने बताया कि वर्तमान में जिन किसानों द्वारा खरीदे गए हल्दी बीज पर योजना के तहत अनुदान दिया जा रहा है, वे स्वस्थ और उच्च गुणवत्ता वाले हैं। विभाग के मुताबिक इनके अंकुरण में किसी तरह की समस्या नहीं है।

अनुदान का भुगतान भी केवल आवश्यक दस्तावेजों की जांच और फसल के भौतिक सत्यापन के बाद ही किया जा रहा है। इससे योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।

138 लाख रुपये का हो चुका भुगतान

मसाला क्षेत्र विस्तार प्रोत्साहन योजना के तहत अब तक किसानों के बैंक खातों में 138 लाख रुपये यानी 1.38 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इससे योजना के माध्यम से किसानों को मिल रहे प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ का अंदाजा लगाया जा सकता है।

सरकार का जोर केवल हल्दी का रकबा बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए प्रदेश में कृषि को अधिक विविध और बाजारोन्मुख बनाने की कोशिश की जा रही है।

मसाला उद्योगों को भी मिलेगा स्थानीय उत्पादन का फायदा

हल्दी और अन्य मसाला फसलों के क्षेत्र विस्तार का लाभ केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा। स्थानीय उत्पादन बढ़ने से मसाला आधारित उद्योगों को प्रदेश के भीतर ही कच्चा माल उपलब्ध हो सकेगा।

इससे कृषि और प्रसंस्करण उद्योग के बीच बेहतर तालमेल विकसित होने की संभावना है। लंबे समय में यह व्यवस्था किसानों के लिए बाजार के नए अवसर पैदा करने के साथ-साथ प्रदेश में कृषि आधारित व्यवसायों को भी मजबूती दे सकती है।

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