
सूरजपुर: इम्पैक्ट इंडिया फाउंडेशन की 256वीं लाइफलाइन एक्सप्रेस का सूरजपुर जिले में 21 दिवसीय स्वास्थ्य सेवा अभियान 5 सितंबर को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। बिश्रामपुर रेलवे स्टेशन पर 16 अगस्त से 5 सितंबर तक संचालित इस चलते-फिरते अस्पताल के माध्यम से जिले के दूरस्थ एवं जरूरतमंद क्षेत्रों तक विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं पहुंचाई गईं। अभियान के दौरान कुल 15,273 मरीजों का पंजीयन हुआ तथा विभिन्न रोगों की जांच, उपचार और आवश्यक शल्य चिकित्सा नि:शुल्क की गई।
समापन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कलेक्टर रेना जमील ने लाइफलाइन एक्सप्रेस की पूरी टीम, स्वास्थ्य विभाग, पंचायत प्रतिनिधियों, जिला प्रशासन एवं सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शुरुआत के समय सभी में जिस उत्साह के साथ सेवा करने की ऊर्जा दिखाई दे रही थी, वही भावना पूरे 21 दिनों तक बनी रही। अब विदाई का समय आने पर जहां एक ओर अभियान की सफलता की खुशी है, वहीं दूसरी ओर लाइफलाइन एक्सप्रेस की टीम के वापस जाने का भावुक क्षण भी है।
कलेक्टर ने कहा कि इस वर्ष जिले में बारिश की स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण रही। ऐसे समय में भी दूर-दराज क्षेत्रों के लोग उपचार और सर्जरी के लिए बिश्रामपुर पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल चिकित्सा टीम की नहीं, बल्कि जिले के स्वास्थ्य अमले, पंचायत प्रतिनिधियों, सरपंचों, सचिवों और उन सभी लोगों की सामूहिक मेहनत का परिणाम है, जिन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों को लाइफलाइन एक्सप्रेस के बारे में जानकारी दी और मरीजों को शिविर तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से आंखों की सर्जरी अत्यंत संवेदनशील होती है। ऐसे मामलों में चिकित्सकों द्वारा पूरी सावधानी और विशेषज्ञता के साथ उपचार किया गया। समापन के दौरान जिला पंचायत सीईओ विजेंद्र सिंह पाटले, सीएमएचओ कपिल देव पैकरा, डॉ. रोहिणी चौगले, विजयराज अग्रवाल सहित अन्य उपस्थित रहे।
15 हजार से अधिक मरीजों ने कराया पंजीयन :-
लाइफलाइन एक्सप्रेस के दौरान 6,934 लोगों का आउटरीच पंजीयन और 8,339 मरीजों का ओपीडी पंजीयन हुआ। इस प्रकार कुल 15,273 मरीजों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लिया। स्वास्थ्य विभाग एवं लाइफलाइन एक्सप्रेस की टीम द्वारा 4,000 से अधिक घरों का भ्रमण कर जरूरतमंद मरीजों को चिन्हित करने और उन्हें उपचार के लिए प्रेरित करने का कार्य भी किया गया।विभिन्न चिकित्सा सेवाओं के तहत 4,458 मरीजों का नेत्र परीक्षण, 1,454 मरीजों का ईएनटी परीक्षण, 422 मरीजों की स्त्री रोग संबंधी जांच, 263 मरीजों की हड्डी एवं अस्थि संबंधी जांच तथा 176 मरीजों का प्लास्टिक सर्जरी संबंधी पंजीयन किया गया।
925 से अधिक मरीजों की हुई सर्जरी
लाइफलाइन एक्सप्रेस में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा विभिन्न प्रकार की शल्य चिकित्सा की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 675 नेत्र सर्जरी, 79 कान की सर्जरी, 23 ऑर्थोपेडिक सर्जरी, 41 प्लास्टिक सर्जरी तथा 107 पैप-स्मियर बायोप्सी प्रक्रियाएं की गईं। इस प्रकार अभियान के दौरान 925 से अधिक प्रमुख सर्जिकल प्रक्रियाएं संपन्न हुईं। इसके साथ ही 7,009 लोगों की ब्लड प्रेशर एवं डायबिटीज की जांच की गई। जरूरतमंद मरीजों को उपचार के बाद सहायक उपकरण एवं चश्मे भी उपलब्ध कराए गए।
2,829 मरीजों को मिले चश्मे एवं सहायक उपकरण
लाइफलाइन एक्सप्रेस के माध्यम से कुल 2,829 सहायक उपकरण एवं चश्मे वितरित किए गए। इनमें 609 रीडिंग ग्लासेस, 1,834 दूरी के बाइफोकल चश्मे तथा 386 ऑर्थोसिस उपकरण शामिल हैं। ऑर्थोसिस उपकरण 177 मरीजों के लिए प्रदान किए गए। इससे ऐसे मरीजों को विशेष राहत मिली, जिन्हें आर्थिक कठिनाइयों के कारण लंबे समय से आवश्यक चश्मे अथवा सहायक उपकरण उपलब्ध नहीं हो पा रहे थे।
लाइफलाइन एक्सप्रेस बनी जरूरतमंदों के लिए सचमुच जीवन रेखा:-
कलेक्टर श्रीमती रेना जमील ने कहा कि लाइफलाइन एक्सप्रेस केवल एक ट्रेन नहीं, बल्कि जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए जीवन रेखा बनकर जिले में पहुंची। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के लिए बड़े शहरों में जाकर विशेषज्ञ चिकित्सकों से उपचार एवं महंगी सर्जरी कराना संभव नहीं था, उन्हें उनके क्षेत्र के समीप ही अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हुई। बिश्रामपुर रेलवे स्टेशन पर लाइफलाइन एक्सप्रेस के आगमन से जिले के हजारों लोगों को इसका लाभ मिला। कलेक्टर ने कहा कि जुलाई-अगस्त में बारिश और खेती-किसानी के व्यस्त समय के कारण यह आशंका थी कि मरीज बड़ी संख्या में शिविर तक पहुंच पाएंगे या नहीं। लेकिन जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और पंचायत प्रतिनिधियों के समन्वित प्रयासों से लोगों को जागरूक किया गया। बारिश के बावजूद लोग दूर-दराज के क्षेत्रों से उपचार, जांच एवं सर्जरी के लिए पहुंचे। उन्होंने कहा कि आंखों, कान, दांत, हड्डी, प्लास्टिक सर्जरी तथा महिलाओं से संबंधित स्वास्थ्य जांच सहित विभिन्न सेवाओं का लाभ लोगों ने लिया। बड़ी संख्या में लोगों को चश्मे एवं अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए, जिससे उनकी दैनिक जीवन की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
वर्ष 1991 में शुरू हुई थी लाइफलाइन एक्सप्रेस की यात्रा :-
उल्लेखनीय है कि लाइफलाइन एक्सप्रेस विश्व की पहली आधुनिक हॉस्पिटल ट्रेन है, जिसकी शुरुआत 16 जुलाई 1991 को हुई थी। इम्पैक्ट इंडिया फाउंडेशन, भारतीय रेलवे एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े सहयोगी संस्थानों की सहभागिता से संचालित यह पहल देश के दूरस्थ क्षेत्रों में जरूरतमंद लोगों तक विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के उद्देश्य से कार्य करती है। सूरजपुर में आयोजित यह 256वां लाइफलाइन एक्सप्रेस प्रोजेक्ट था। लाइफलाइन एक्सप्रेस में अत्याधुनिक मल्टी-स्पेशियलिटी ऑपरेशन थिएटर, रिकवरी रूम, चिकित्सा उपकरणों तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की सुविधा उपलब्ध रही। इसके माध्यम से जिले के लोगों को बड़े शहरों की तर्ज पर विशेषज्ञ चिकित्सा एवं शल्य चिकित्सा सेवाएं उनके नजदीक ही नि:शुल्क प्राप्त हुईं।
सामूहिक प्रयास से सफल हुआ 21 दिवसीय अभियान:-
लाइफलाइन एक्सप्रेस के सफल आयोजन में जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण स्तर के मैदानी अमले, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, इम्पैक्ट इंडिया फाउंडेशन की टीम तथा भारतीय रेलवे का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
कलेक्टर श्रीमती जमील ने सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे अभियान यह साबित करते हैं कि सामूहिक इच्छाशक्ति और बेहतर समन्वय के माध्यम से विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा सकता है। 21 दिनों की इस स्वास्थ्य यात्रा के समापन पर लाइफलाइन एक्सप्रेस की टीम को भावभीनी विदाई दी गई। अभियान के दौरान हजारों मरीजों को मिली नि:शुल्क जांच, उपचार, सर्जरी, चश्मे एवं सहायक उपकरणों की सुविधा जिले के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य उपलब्धि के रूप में दर्ज हुई।




















