नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना में एयर कमोडोर शक्ति शर्मा ने महिला नेतृत्व के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उन्हें पदोन्नति देकर एयर वाइस मार्शल बनाया गया है। इसके साथ ही वह भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में इस रैंक तक पहुंचने वाली पहली नॉन-मेडिकल महिला अधिकारी बन गई हैं।शक्ति शर्मा ने मंगलवार, 1 सितंबर 2026 को एयर हेडक्वार्टर में असिस्टेंट चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (एजुकेशन) के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली।

तीनों सेनाओं में बनाया नया रिकॉर्ड

शक्ति शर्मा की यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि मेडिकल ब्रांच से अलग किसी महिला अधिकारी का एयर वाइस मार्शल के पद तक पहुंचना सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने रक्षा क्षेत्र और उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करने की दिशा में भी काम किया। उनके कार्यकाल में आईआईटी कानपुर और पुणे यूनिवर्सिटी में IAF Chairs of Excellence की स्थापना हुई, जिससे शिक्षा और रक्षा क्षेत्र के बीच रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा मिला।

1994 में शुरू हुआ था सफर

शक्ति शर्मा को 18 जून 1994 को भारतीय वायुसेना की एजुकेशन ब्रांच में कमीशन मिला था। इसके बाद तीन दशकों से अधिक के करियर में उन्होंने अलग-अलग महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।उन्होंने ट्रेनिंग संस्थानों, फील्ड स्टेशनों, कमांड मुख्यालयों और एयर हेडक्वार्टर में सेवाएं दीं। लंबे अनुभव और लगातार जिम्मेदारियों के साथ उन्होंने वायुसेना में नेतृत्व के कई महत्वपूर्ण पड़ाव पार किए।

सैनिक स्कूल की कमान संभालने वाली पहली महिला अधिकारी

शक्ति शर्मा ने अपने करियर में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। वह तीनों सेनाओं में सैनिक स्कूल की प्रिंसिपल बनने वाली पहली महिला अधिकारी रहीं। उन्होंने कपूरथला सैनिक स्कूल की प्रिंसिपल के तौर पर जिम्मेदारी संभाली थी।इसके अलावा मेडिकल ब्रांच से बाहर वह पहली महिला अधिकारी बनीं, जिन्हें ग्रुप कैप्टन और बाद में एयर कमोडोर के पद पर पदोन्नति मिली। वर्ष 2024 में एयर कमोडोर बनने के बाद अब एयर वाइस मार्शल के रूप में उनका नया अध्याय शुरू हुआ है।

महिलाओं के लिए बढ़ा नेतृत्व का दायरा

शक्ति शर्मा का करियर भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं के लिए खुलते नेतृत्व के नए अवसरों का उदाहरण है। उनकी उपलब्धि न केवल वायुसेना बल्कि देश की युवा महिलाओं के लिए भी प्रेरणादायक मानी जा रही है।तीन दशक से अधिक की सेवा के बाद इस शीर्ष जिम्मेदारी तक पहुंचकर उन्होंने यह दिखाया है कि सैन्य क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका अब केवल पारंपरिक सीमाओं तक सीमित नहीं है। उनका सफर भारतीय वायुसेना के आदर्श वाक्य टच द स्काई विद ग्लोरी की भावना को भी मजबूती देता है।

Leave a reply

Please enter your name here
Please enter your comment!