
मध्य प्रदेश : पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने आरक्षण व्यवस्था और सामाजिक एकजुटता को लेकर अपनी राय सामने रखी है। उन्होंने कहा कि आरक्षण में सुधार की स्थिति तभी आएगी, जब अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोग सामान्य सीटों पर भी बड़ी संख्या में चुनाव जीतने लगेंगे। उनका कहना है कि जब तक ऐसा नहीं होता, आरक्षण जारी रहना चाहिए।
आरक्षण पर उमा भारती ने रखी लंबी अवधि वाली बात
उमा भारती ने कहा कि यदि एससी और एसटी वर्ग के लोग सामान्य सीटों से चुनाव जीतने की स्थिति में नहीं आते हैं तो आरक्षण को समाप्त करने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने यहां तक कहा कि इसके लिए एक लाख साल भी लग जाएं तो आरक्षण जारी रहना चाहिए।उन्होंने प्राइवेट सेक्टर में भी आरक्षण की जरूरत पर जोर दिया। उनका तर्क है कि जब रोजगार और आर्थिक गतिविधियों का बड़ा हिस्सा निजी क्षेत्र में है तो वंचित वर्गों की भागीदारी वहां भी सुनिश्चित होनी चाहिए।
जातीय जनगणना पर बोलीं, दबाव बढ़ेगा तो रास्ता खुलेगा
उमा भारती ने जातीय जनगणना के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जब इसकी मांग को लेकर दबाव बढ़ेगा तो जातीय जनगणना भी हो जाएगी। उनके मुताबिक समाज के भीतर जातियों के आधार पर प्रतिनिधित्व और राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर लगातार विवाद होते रहते हैं।उन्होंने कहा कि केवल अपनी-अपनी जाति के हित की बात करने के बजाय सामाजिक स्तर पर एकजुटता बढ़ाने की जरूरत है।
ओबीसी समाज को लेकर दिया सामाजिक एकता का संदेश
उमा भारती ने ओबीसी समाज के भीतर होने वाले मतभेदों का उदाहरण देते हुए कहा कि एक ही व्यापक सामाजिक वर्ग से जुड़े लोगों के बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर टकराव नहीं होना चाहिए। उन्होंने अंतरजातीय सामाजिक संबंधों और आपसी मेलजोल बढ़ाने की बात कही।उन्होंने गांव में ओबीसी समुदाय के दो परिवारों के बीच विवाह को लेकर हुए विवाद का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि जब दोनों पक्ष ओबीसी वर्ग से आते हैं तो फिर आपसी विवाह को लेकर विरोध क्यों होना चाहिए।
एक पूजा और सामाजिक रिश्तों से मजबूत होगी एकता: उमा
उमा भारती ने सामाजिक एकता के लिए एक देवता, एक पूजा पद्धति और आपस में रोटी-बेटी के रिश्ते जैसे विचारों पर जोर दिया। उनका कहना है कि समाज के अलग-अलग समूहों के बीच आपसी संबंध मजबूत होंगे तो उनकी सामूहिक ताकत भी बढ़ेगी।




















