जबलपुर : मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में मानव और बाघ के बीच बढ़ता टकराव अब गंभीर चिंता का विषय बन गया है। जंगल से सटे गांवों और कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में बाघों की गतिविधियां बढ़ने के साथ ग्रामीणों पर हमले की घटनाएं भी सामने आ रही हैं।पिछले छह महीनों के आंकड़ों के अनुसार बाघों ने 8 लोगों को अपना निशाना बनाया। इनमें 6 लोगों की जान चली गई, जबकि 2 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। लगातार सामने आ रही घटनाओं ने जंगल से लगे गांवों में भय का माहौल पैदा कर दिया है।

अगस्त में लगातार सामने आए हमले

अगस्त 2026 में बालाघाट में मानव-बाघ संघर्ष की कई घटनाएं दर्ज हुईं। 2 अगस्त की रात कान्हा बफर क्षेत्र के पर्रापुर गांव में बाघ घर के भीतर पहुंच गया और एक महिला पर हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।इसके बाद 7 अगस्त को मालखेड़ी क्षेत्र में किसान युवक राजकुमार परते पर बाघ ने हमला किया। वहीं 9 अगस्त को खैरलांजी क्षेत्र के पांडरवानी-सतीटोला में भी बाघ के हमले में एक किसान की मौत हो गई। इस घटना में तीन मवेशियों के मारे जाने की भी जानकारी सामने आई।18 अगस्त को कान्हा बफर जोन के करेली गांव के निवासी संतोष मेश्राम पर भी बाघ ने अचानक हमला कर दिया। लगातार हो रही इन घटनाओं से जंगल के आसपास रहने वाले ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

21 गांव जंगल से सटे, करीब 28 बाघों की मौजूदगी

कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र से करीब 21 गांव जंगल की सीमा से लगे हुए बताए जाते हैं। इलाके में लगभग 28 बाघों की मौजूदगी बताई गई है। ऐसे में जंगल और आबादी के बीच सीधा संपर्क होने से मानव-बाघ संघर्ष का खतरा लगातार बना हुआ है।मार्च 2026 से अब तक छह लोगों की मौत और दो लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई है।

विधायक मधु भगत ने मुख्यमंत्री के सामने उठाया मुद्दा

लगातार हो रही घटनाओं के बीच कांग्रेस विधायक मधु भगत ने बालाघाट दौरे के दौरान मुख्यमंत्री से मुलाकात कर मानव-बाघ संघर्ष का मुद्दा उठाया। उन्होंने प्रभावित गांवों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत बताई।विधायक ने गांवों के आसपास मजबूत बाड़ लगाने, पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करने और जंगल से लगे क्षेत्रों में नियमित पेट्रोलिंग बढ़ाने की मांग की। इसके अलावा बाघों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए रियल टाइम ट्रैकिंग सिस्टम लागू करने और ग्रामीणों को बाघ से बचाव के लिए जरूरी प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया।

सिर्फ हमले के बाद कार्रवाई से नहीं रुकेगा संघर्ष

विशेषज्ञों और स्थानीय जानकारों के अनुसार मानव-बाघ संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए केवल घटना होने के बाद रेस्क्यू या निगरानी बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए जंगल और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने के साथ दीर्घकालिक योजना की जरूरत है।जंगल के भीतर बाघों के लिए पर्याप्त प्राकृतिक शिकार और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इससे बाघों के भोजन और पानी की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आने की संभावना कम की जा सकती है।

ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था जरूरी

बालाघाट में लगातार हो रही घटनाओं ने वन क्षेत्र से लगे गांवों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों को समय रहते बाघ की मौजूदगी की जानकारी मिले, इसके लिए निगरानी और अलर्ट सिस्टम मजबूत करना जरूरी है।बढ़ते मानव-बाघ संघर्ष के बीच अब तत्काल राहत के साथ ऐसी स्थायी व्यवस्था की जरूरत है, जिससे ग्रामीणों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो और बाघों का प्राकृतिक आवास भी सुरक्षित बना रहे।

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