
प्याज की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच केंद्र सरकार ने आपूर्ति बढ़ाने के लिए एक खास कदम उठाया है। महाराष्ट्र के नाशिक में रखे बफर स्टॉक से प्याज को रेलवे रैक के जरिए देश के बड़े खपत केंद्रों तक भेजा जा रहा है। इसके लिए कांदा एक्सप्रेस का इस्तेमाल किया जा रहा है।
एक साल में 59 फीसदी महंगा हुआ प्याज
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 24 अगस्त 2026 को देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत 43.53 रुपये प्रति किलो पहुंच गई। पिछले साल इसी अवधि में यह कीमत 27.37 रुपये प्रति किलो थी। यानी सालाना आधार पर खुदरा कीमत में करीब 59 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।थोक बाजार में भी तेजी देखने को मिली है। औसत थोक कीमत 35.58 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई, जबकि एक साल पहले यह 21.23 रुपये प्रति किलो थी।बड़े शहरों में स्थिति और ज्यादा चुनौतीपूर्ण नजर आई। 24 अगस्त को चेन्नई में प्याज 60 रुपये, दिल्ली में 55 रुपये और कोलकाता में 53 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा था।
नाशिक से पांच बड़े बाजारों तक पहुंचेगा स्टॉक
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे के मुताबिक नाशिक में रखे बफर स्टॉक को रेल रैक के जरिए बड़े पैमाने पर भेजा जा रहा है। इस खेप के 26 अगस्त तक संबंधित केंद्रों पर पहुंचने की उम्मीद है।पहले चरण में चेन्नई, मदुरै, दिल्ली, एर्णाकुलम और गुवाहाटी को प्याज भेजा जाएगा। इन शहरों के थोक और खुदरा बाजारों में स्टॉक उतारा जाएगा। बाजार की मांग को देखते हुए आगे दूसरे शहरों को भी इस व्यवस्था में शामिल किया जा सकता है।
कांदा एक्सप्रेस का मकसद क्या है
कांदा एक्सप्रेस की पहल का उद्देश्य उन इलाकों तक तेजी से प्याज पहुंचाना है, जहां कीमतों में मौसमी उछाल देखने को मिलता है। रेल परिवहन के जरिए एक साथ बड़ी मात्रा में प्याज भेजकर बाजार में उपलब्धता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।इससे बफर स्टॉक का इस्तेमाल सीधे अधिक खपत वाले बाजारों में किया जा सकेगा और आपूर्ति बढ़ने से कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है।
सरकार के पास कितना प्याज उपलब्ध है
भारत के पास फिलहाल करीब 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक बताया गया है। कांदा एक्सप्रेस के जरिए इसी स्टॉक का इस्तेमाल बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।यह व्यवस्था पहली बार 2024-25 में शुरू की गई थी। इसका मूल उद्देश्य प्याज की उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों में होने वाली तेज मौसमी बढ़ोतरी को नियंत्रित करना है।




















