
नई दिल्ली: भारतीय सर्राफा बाजार में सोने की तेजी लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। कीमत 1.63 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार करने के बाद निवेशकों, कारोबारियों और आम खरीदारों की नजर अब इसकी अगली चाल पर टिक गई है। वायदा बाजार में अक्टूबर डिलीवरी वाले सोने में जोरदार मजबूती देखने को मिली, जिससे कीमती धातु एक बार फिर ऊंचे स्तर पर पहुंच गई।सोने की इस तेजी के पीछे घरेलू और वैश्विक स्तर पर कई कारक एक साथ काम कर रहे हैं। कमजोर अमेरिकी डॉलर, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अनिश्चितता, सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी ने बाजार को मजबूत समर्थन दिया है।
सुरक्षित निवेश की तलाश ने बढ़ाई मांग
जब वैश्विक अर्थव्यवस्था या राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक अपेक्षाकृत जोखिम वाले निवेश विकल्पों से दूरी बनाने लगते हैं। ऐसे समय में सोने को सुरक्षित संपत्ति के रूप में प्राथमिकता मिलती है।मौजूदा परिस्थितियों में भी निवेशकों का रुझान सोने की ओर बढ़ा है। बढ़ती मांग का सीधा असर इसकी कीमतों पर दिखाई दे रहा है और बाजार में तेजी का माहौल बना हुआ है।
कमजोर डॉलर भी बन रहा बड़ी वजह
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का कारोबार मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में होता है। डॉलर कमजोर पड़ने पर अन्य मुद्राओं के खरीदारों के लिए सोना अपेक्षाकृत आकर्षक हो जाता है। इससे वैश्विक मांग में इजाफा हो सकता है और कीमतों को सहारा मिलता है।अमेरिका की आर्थिक नीतियों और ब्याज दरों की दिशा को लेकर बनी अनिश्चितता भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर रही है। भविष्य की आर्थिक स्थिति को लेकर बढ़ती चिंता के बीच सोना एक बार फिर निवेशकों के पसंदीदा विकल्पों में शामिल हो गया है।
वैश्विक तनाव से मिल रहा अतिरिक्त सहारा
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में राजनीतिक और आर्थिक तनाव का असर बुलियन बाजार पर भी पड़ रहा है। अनिश्चित परिस्थितियों में निवेशक अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए सोने जैसे विकल्पों में निवेश बढ़ाते हैं।बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक अस्थिरता बनी रहती है, तब तक सोने की कीमतों को समर्थन मिल सकता है। हालांकि, बाजार की परिस्थितियां बदलने पर इसमें उतार-चढ़ाव भी संभव है।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से मजबूत हुआ बाजार
कई देशों के केंद्रीय बैंक अपने स्वर्ण भंडार को बढ़ाने में जुटे हैं। बड़े संस्थागत खरीदारों की लगातार मांग से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की स्थिति मजबूत बनी हुई है।जब केंद्रीय बैंक बड़े पैमाने पर खरीदारी करते हैं तो मांग बढ़ने के साथ कीमतों को भी समर्थन मिलता है। पिछले कुछ समय से सोने की तेजी के पीछे इसे भी महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है।
शादी और त्योहारों की खरीदारी पर असर
सोने की बढ़ती कीमतों का सीधा असर उन ग्राहकों पर पड़ रहा है, जो शादी-विवाह या त्योहारों के लिए आभूषण खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। महंगे दामों के कारण कुछ खरीदार खरीदारी टाल सकते हैं, जबकि कई लोग कम वजन के गहनों का विकल्प चुन रहे हैं।इसके बावजूद भारत में सोने की मांग पूरी तरह कमजोर नहीं पड़ी है। यहां इसे केवल आभूषण के रूप में नहीं, बल्कि निवेश और पारिवारिक संपत्ति के रूप में भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
क्या आगे भी जारी रह सकती है तेजी?
आने वाले दिनों में सोने की दिशा कई वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगी। अमेरिकी डॉलर की स्थिति, ब्याज दरों से जुड़े फैसले, अंतरराष्ट्रीय तनाव और निवेशकों की सुरक्षित संपत्ति की मांग इसके भाव तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।यदि डॉलर पर दबाव बना रहा और वैश्विक अनिश्चितता कम नहीं हुई, तो सोने की कीमतों को आगे भी समर्थन मिल सकता है। दूसरी ओर, लगातार तेज बढ़त के बाद बाजार में मुनाफावसूली होने पर कुछ समय के लिए गिरावट भी आ सकती है।
निवेशकों के लिए फिर बना भरोसे का विकल्प
पिछले कुछ वर्षों में सोने ने निवेशकों का ध्यान लगातार खींचा है। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच इसे पोर्टफोलियो में संतुलन बनाने वाले विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। फिजिकल गोल्ड के अलावा निवेशक गोल्ड ईटीएफ और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए भी इसमें भागीदारी बढ़ा रहे हैं।फिलहाल 1.63 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंचने के बाद बाजार की नजर अगले बड़े संकेतों पर है। वैश्विक अर्थव्यवस्था, डॉलर की चाल और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम ही आने वाले समय में यह तय करेंगे कि सोने की तेजी आगे और मजबूत होती है या बाजार में कुछ राहत देखने को मिलती है।




















