
सूरजपुर: छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, रायपुर के निर्देशानुसार राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस 2026 की जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सूरजपुर में किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को विज्ञान आधारित परियोजनाओं, नवाचार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा स्थानीय समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान के लिए विद्यार्थियों को तैयार करने हेतु आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ जिले के डीएमसी मनोज साहू एवं सहायक संचालक अजय सिंह ने मां सरस्वती के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार, नई दिल्ली के मार्गदर्शन में आयोजित यह कार्यशाला “सतत विकास के लिए विज्ञान एवं नवाचार” विषय पर केंद्रित रही।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए डीएमसी मनोज साहू ने कहा कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करना विज्ञान शिक्षकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय तेजी से तकनीकी एवं एआई आधारित हो रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखते हुए नवाचार और वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए प्रोत्साहित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के नए वैज्ञानिक विचार और नवाचार ही भविष्य में उनके लिए बेहतर करियर के अवसरों का आधार बन सकते हैं।
कार्यशाला में राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के पांच प्रमुख उप-विषयों पर विषय विशेषज्ञों ने विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान की। डॉ. धनंजय पांडे, प्राध्यापक, नवीन कन्या महाविद्यालय सूरजपुर ने “सतत विकास के लिए भारतीय ज्ञान प्रणालियों का अनुप्रयोग” विषय पर भारतीय पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।डॉ. ओम प्रकाश, प्राध्यापक, शासकीय वेटरनरी महाविद्यालय सूरजपुर ने “जल संचयन, जल का प्रभावी उपयोग, जल पुनर्चक्रण एवं जल संरक्षण” विषय पर परियोजना आधारित जानकारी देते हुए जल संकट के समाधान में विद्यार्थियों की भूमिका को रेखांकित किया।
इसी क्रम में डॉ. तुलसीराम रहंगडाले, प्राध्यापक, रेवती रमण महाविद्यालय सूरजपुर ने “खाद्य, कृषि एवं स्वास्थ्य” विषय पर वैज्ञानिक परियोजनाओं की संभावनाओं तथा स्थानीय स्तर पर किए जा सकने वाले नवाचारों की जानकारी दी।डॉ. संदीप सोनी, प्राध्यापक, नवीन कन्या महाविद्यालय सूरजपुर ने “अपशिष्ट प्रबंधनकम करना, पुनः उपयोग, पुनः प्राप्ति, पुनः डिजाइन एवं पुनर्चक्रण” विषय पर प्रकाश डालते हुए कचरा प्रबंधन को लेकर नवीन एवं उपयोगी परियोजनाओं की संभावनाओं को समझाया।वहीं संतोष कुमार उपाध्याय, व्याख्याता, शासकीय हाई स्कूल लक्ष्मीपुर ने “ऊर्जा—अन्वेषण, प्रयोग, सुधार एवं विकास” विषय पर विद्यार्थियों के लिए उपयोगी, व्यावहारिक एवं नवाचारपरक परियोजनाओं के निर्माण की प्रक्रिया समझाई।
कार्यशाला में सूरजपुर जिले के पूर्व माध्यमिक, हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों के विज्ञान एवं गणित विषय के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। विशेषज्ञों ने पांचों उप-विषयों की मूल अवधारणा, परियोजना के लिए विषय चयन, समस्या की पहचान, वैज्ञानिक पद्धति, नवाचार, आंकड़ों के संकलन एवं विश्लेषण तथा परियोजना को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की प्रक्रिया की जानकारी दी।
साथ ही राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस 2026 में पंजीयन की प्रक्रिया एवं आवश्यक दिशा-निर्देशों से शिक्षकों को अवगत कराया गया। सभी संबंधित विद्यालयों को 31 दिसंबर 2026 तक पंजीयन प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
कार्यशाला के दौरान शिक्षकों ने स्थानीय समस्याओं को केंद्र में रखकर वैज्ञानिक एवं नवाचार आधारित परियोजनाएं विकसित करने में विशेष रुचि दिखाई। जल संरक्षण, ऊर्जा, कृषि, स्वास्थ्य, अपशिष्ट प्रबंधन तथा भारतीय ज्ञान प्रणालियों जैसे विषयों को विद्यार्थियों के दैनिक जीवन से जोड़कर परियोजनाओं के रूप में विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम का सफल संचालन डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर शंभू प्रसाद निषाद द्वारा किया गया। कार्यशाला के सफल आयोजन में संस्था की प्राचार्य अनु कांडे, सुनील कुमार पांडे, डॉ. निशा सिंह, दीपक पटेल, दुष्यंत राजवाड़े, गोपाल सिंह, दिनेश प्रजापति एवं आदित्य दुबे का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
समग्र रूप से कार्यशाला शिक्षकों के लिए ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी रही। कार्यशाला के माध्यम से शिक्षकों को विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने तथा स्थानीय समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान खोजने वाली नवाचारपरक परियोजनाओं को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।




















