
नई दिल्ली : चल रही BWF वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 में भारत की त्रिशा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने शुक्रवार को ऐसा कारनामा कर दिखाया, जिसका भारतीय बैडमिंटन फैंस को लंबे समय से इंतजार था. भारतीय जोड़ी ने महिला डबल्स के क्वार्टर फाइनल में चीन की चौथी वरीय जिया यी फान और झांग शू जियान को 16-21, 21-15, 21-13 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बना ली. इस जीत के साथ भारत का कम से कम ब्रॉन्ज मेडल पक्का हो गया है.
पहला गेम हारकर भी नहीं टूटी हिम्मत
मुकाबले की शुरुआत भारतीय जोड़ी के पक्ष में नहीं रही. चीनी खिलाड़ियों ने पहले गेम में दबाव बनाए रखा और 21-16 से गेम अपने नाम कर लिया. हालांकि, त्रिशा और गायत्री ने इसके बाद रणनीति बदली और आक्रामक खेल के साथ वापसी शुरू की.
दूसरे गेम में चीन की जोड़ी ने शुरुआत में बढ़त बनाई, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने नेट प्ले और तेज स्मैश के दम पर मुकाबले का रुख पलट दिया. 21-15 से दूसरा गेम जीतकर भारत ने स्कोर 1-1 कर दिया.
निर्णायक गेम में चीन को वापसी का मौका नहीं दिया
तीसरे गेम में त्रिशा और गायत्री ने शुरुआत से ही लय बनाए रखी. भारतीय जोड़ी ने दबाव के बावजूद अपनी आक्रामकता कम नहीं की और 21-13 से निर्णायक गेम जीत लिया. करीब 69 मिनट चले इस मुकाबले में भारतीय जोड़ी ने 2-1 से जीत दर्ज कर सेमीफाइनल का टिकट हासिल किया.
2011 के बाद महिला डबल्स में भारत को फिर मिलेगा मेडल
त्रिशा-गायत्री की यह जीत इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि महिला डबल्स में भारत को वर्ल्ड चैंपियनशिप का पिछला मेडल 2011 में मिला था. तब ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था. अब 15 साल बाद त्रिशा और गायत्री ने भारतीय महिला डबल्स को फिर विश्व मंच पर पोडियम तक पहुंचा दिया है.
चोट के बाद वापसी का मिला बड़ा इनाम
त्रिशा और गायत्री के लिए यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि इस साल की शुरुआत में ट्रेनिंग के दौरान त्रिशा के टखने में गंभीर चोट लगी थी. इसके बाद लंबी रिहैबिलिटेशन प्रक्रिया से गुजरने के बाद दोनों ने इंडोनेशिया ओपन से वापसी की. इसके बाद अमेरिकी ओपन में खेलने के बाद उन्होंने इसी महीने फिलीपींस इंटरनेशनल चैलेंज का खिताब भी जीता.
अब भारतीय जोड़ी की नजर सिर्फ ब्रॉन्ज पर नहीं है. सेमीफाइनल में पहुंच चुकी त्रिशा और गायत्री के पास वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत के लिए पदक का रंग बदलने का मौका है.




















