DRDO Testing:  भारत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक को मजबूत करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में DRDO और भारतीय वायुसेना PGB-500 प्रिसिजन गाइडेड बम का Su-30MKI लड़ाकू विमान से परीक्षण करने की तैयारी में हैं। प्रस्तावित परीक्षण में हथियार की उड़ान के दौरान स्थिरता, विमान से अलग होने के बाद उसकी कार्यप्रणाली और लक्ष्य तक पहुंचने की सटीकता जैसी क्षमताओं का आकलन किया जाएगा।रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षण अगले महीने किए जाने की तैयारी है। सफल परिणाम मिलने पर इसके आगे के विकास और बड़े पैमाने पर उत्पादन का रास्ता खुल सकता है।

PGB-500 की सबसे बड़ी खासियत क्या होगी

प्रिसिजन गाइडेड बम का मूल उद्देश्य पारंपरिक बमों की तुलना में अधिक नियंत्रित और सटीक तरीके से निर्धारित लक्ष्य पर हमला करना है। PGB-500 को भी इसी उद्देश्य के अनुरूप विकसित किया जा रहा है।इसका डिजाइन रणनीतिक और जमीनी लक्ष्यों के खिलाफ प्रभावी इस्तेमाल को ध्यान में रखकर किए जाने की बात सामने आई है। परीक्षणों में यह देखा जाएगा कि वास्तविक उड़ान परिस्थितियों में हथियार अपेक्षित प्रदर्शन करता है या नहीं।

Su-30MKI से परीक्षण क्यों अहम

Su-30MKI भारतीय वायुसेना के प्रमुख लड़ाकू विमानों में शामिल है। इस विमान से PGB-500 का परीक्षण होने पर यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि हथियार को विमान के साथ किस तरह प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जा सकता है।परीक्षण के दौरान बम को विमान से रिलीज करने के बाद उसकी उड़ान और लक्ष्य तक पहुंचने की क्षमता का भी मूल्यांकन किया जाएगा। इन परीक्षणों के परिणाम आगे के विकास के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

सफलता मिली तो उत्पादन की दिशा में बढ़ेगा कदम

PGB-500 के विकास में DRDO के साथ हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और निजी क्षेत्र की कंपनियों के सहयोग की बात सामने आई है। परीक्षण सफल रहने पर इसके उत्पादन और भारतीय वायुसेना में संभावित शामिल किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।इस तरह PGB-500 का विकास भारत की स्वदेशी सटीक-हमला क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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