
नारायणपुर: देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर अबूझमाड़ के इतिहास में एक नया और गौरवपूर्ण अध्याय जुड़ गया। दशकों तक नक्सल हिंसा और भय के साये में रहे अबूझमाड़ के 9 गांवों में आजादी के बाद पहली बार पूरे सम्मान और उत्साह के साथ तिरंगा फहराया गया। कोरसकोडो, हचेकोटी, आदनार, बोटेर, कुमनार, दिवालुर, गुंडेकोट, रेकापाल और रासमेटा गांवों में ग्रामीणों ने पहली बार स्वतंत्रता दिवस का पर्व खुलकर मनाया।
ये गांव लंबे समय तक घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाने जाते रहे हैं। नक्सली गतिविधियों और भय के कारण यहां राष्ट्रीय पर्वों का आयोजन करना तथा खुले तौर पर तिरंगा फहराना ग्रामीणों के लिए संभव नहीं हो पाता था। लेकिन बदलते हालात के बीच इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस का नजारा पूरी तरह अलग दिखाई दिया।31 मार्च 2026 को क्षेत्र के नक्सलमुक्त होने के बाद यह पहला स्वतंत्रता दिवस है, जब इन गांवों में राष्ट्रीय ध्वज शान से लहराया। तिरंगे को आसमान में लहराते देख ग्रामीणों के चेहरों पर खुशी, गर्व और उत्साह साफ दिखाई दिया। लोगों ने राष्ट्रीय ध्वज को नमन करते हुए स्वतंत्रता दिवस की खुशियां एक-दूसरे के साथ साझा कीं।
नक्सल के भय से तिरंगे की शान तक
वर्षों तक जिन इलाकों में नक्सलवाद के भय के कारण राष्ट्रीय ध्वज फहराना भी संभव नहीं था, वहां आज भारत का तिरंगा पूरे गौरव के साथ लहराया। यह केवल ध्वजारोहण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि अबूझमाड़ में बदलते हालात, लौटती शांति और लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति ग्रामीणों के बढ़ते विश्वास का प्रतीक बन गया।ग्रामीणों के लिए यह अवसर भावुक और ऐतिहासिक रहा। लंबे समय तक राष्ट्रीय पर्वों से दूर रहे इन गांवों में पहली बार स्वतंत्रता दिवस का उत्सव मनाया गया। तिरंगे के सम्मान में जुटे ग्रामीणों ने देश के प्रति अपनी आस्था और राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़ने की भावना को अभिव्यक्त किया।
अबूझमाड़ के इन 9 गांवों में लहराता तिरंगा वर्षों के भय पर आजादी, हिंसा पर शांति और अलगाव पर लोकतंत्र की जीत का संदेश दे रहा है। यह ऐतिहासिक पल अबूझमाड़ के बदलते भविष्य की नई तस्वीर भी प्रस्तुत करता है—जहां कभी नक्सलवाद और भय का प्रभाव था, वहां आज भारत का तिरंगा शान से लहरा रहा है।




















