

शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले से खाद्य एवं औषधि विभाग की कार्रवाई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो के सामने आने के बाद विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि खाद्य सामग्री की गुणवत्ता जांचने पहुंची टीम ने निरीक्षण के दौरान दुकानों पर उपलब्ध चाट, फुल्की और अन्य फास्ट फूड का सेवन किया। इतना ही नहीं, कुछ कर्मचारियों द्वारा खाद्य सामग्री पैक कराकर ले जाने और उसका भुगतान नहीं करने का भी दावा किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
मानसून अभियान के दौरान पहुंची थी टीम
बरसात के मौसम में खाद्य जनित बीमारियों की रोकथाम और लोगों तक सुरक्षित खाद्य सामग्री पहुंचाने के उद्देश्य से विभाग विशेष निरीक्षण अभियान चला रहा है। इसी अभियान के तहत अधिकारियों की टीम शहडोल चौपाटी पहुंची, जहां विभिन्न खाद्य दुकानों का निरीक्षण किया गया। इस दौरान खाद्य पदार्थों के नमूने भी एकत्र किए गए और गुणवत्ता की जांच की प्रक्रिया पूरी की गई।
निरीक्षण के दौरान मुफ्त में सामान लेने के आरोप
दुकानदारों का आरोप है कि जांच के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों ने कई खाद्य पदार्थों का स्वाद लिया। कुछ लोगों ने खाने का सामान पार्सल भी कराया, लेकिन उसके बदले कोई भुगतान नहीं किया। व्यापारियों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
मोबाइल कैमरे में कैद हुआ पूरा घटनाक्रम
बताया जा रहा है कि मौके पर मौजूद किसी व्यक्ति ने पूरी घटना का वीडियो अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया। यही वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या निरीक्षण के दौरान तय नियमों और आचार संहिता का पालन किया गया।
दुकानदारों ने बयां किया अपना दर्द
चौपाटी पर कारोबार करने वाले कुछ व्यापारियों ने नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि बढ़ती लागत और सीमित कमाई के बीच कारोबार चलाना पहले से ही मुश्किल है। ऐसे में यदि जांच के नाम पर बिना भुगतान खाद्य सामग्री ली जाती है तो छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
विभागीय प्रतिक्रिया का इंतजार
वीडियो सामने आने के बाद पूरे मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग इन आरोपों की जांच कर क्या कदम उठाता है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय हो सकती है। फिलहाल मामले में विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।











