

छत्तीसगढ़: कबीरधाम जिले के नेउर गांव की तीन बेटियों ने अपनी मेहनत और लगन से ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। किरण महोबिया, ज्योति महोबिया और सुमन महोबिया ने इस वर्ष राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में सफलता हासिल कर परिवार, गांव और जिले का नाम रोशन किया है।तीनों बहनों की इस उपलब्धि पर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा स्वयं उनके घर पहुंचे और छात्राओं के साथ उनके माता-पिता भगवती महोबिया और राम महोबिया को बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
उप मुख्यमंत्री बोले, यह सफलता पूरे प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा
विजय शर्मा ने कहा कि एक ही परिवार की तीन बेटियों का एक साथ देश की सबसे कठिन मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करना असाधारण उपलब्धि है। उनका कहना था कि यह उदाहरण बताता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद निरंतर मेहनत, अनुशासन और मजबूत संकल्प से किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।उन्होंने उम्मीद जताई कि इन तीनों बहनों की सफलता से प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के अन्य विद्यार्थी भी प्रेरित होंगे और अपने सपनों को पूरा करने के लिए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेंगे।
मेडिकल शिक्षा पूरी कर समाज की सेवा करने का दिया संदेश
मुलाकात के दौरान उप मुख्यमंत्री ने तीनों छात्राओं से उनकी पढ़ाई, परीक्षा की तैयारी और मेडिकल कॉलेज की काउंसलिंग प्रक्रिया को लेकर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने छात्राओं को सलाह दी कि मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के बाद पूरी निष्ठा के साथ अध्ययन करें और कुशल डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करें।उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि समाज और जरूरतमंद लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना भी है। इसलिए भविष्य में अपने ज्ञान और अनुभव का उपयोग जनसेवा के लिए भी करें।
ऑनलाइन पढ़ाई और आपसी सहयोग बना सफलता का आधार
तीनों बहनों ने घर पर रहकर ऑनलाइन माध्यम से नीट की तैयारी की। पढ़ाई के दौरान उन्होंने एक-दूसरे का लगातार सहयोग किया और अनुशासित दिनचर्या के साथ परीक्षा की तैयारी जारी रखी।ज्योति महोबिया और सुमन महोबिया ने पहले ही प्रयास में नीट परीक्षा उत्तीर्ण की। दोनों ने स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, बोड़ला से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की है।वहीं बड़ी बहन किरण महोबिया ने दूसरे प्रयास में सफलता हासिल की। उन्होंने सरस्वती शिशु मंदिर, पांडातराई से अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी।
गांव की बेटियां बनीं नई प्रेरणा
नेउर गांव की इन तीनों बहनों की सफलता अब केवल एक परिवार की उपलब्धि नहीं रह गई है, बल्कि यह उन हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक कहानी बन चुकी है, जो ग्रामीण परिवेश में रहकर सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखते हैं। उनकी उपलब्धि यह साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, नियमित मेहनत और सही दिशा में किया गया प्रयास सफलता की नई इबारत लिख सकता है।










