

बलरामपुर: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर पीवीटीजी एवं पंडो समुदाय को बेहतर, सुलभ एवं समयबद्ध स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में जिले में स्वस्थ छत्तीसगढ़ सार्वभौमिक स्वास्थ्य जांच अभियान का शुभारंभ किया गया। कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विजय कुमार सिंह के नेतृत्व में इस अभियान के अंतर्गत पीएम जनमन के माध्यम से जिले के प्रत्येक पीवीटीजी एवं पंडो परिवार तक स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंचकर घर-घर स्वास्थ्य जांच एवं स्क्रीनिंग करेगी।
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर जिले के विभिन्न पीवीटीजी ग्रामों एवं बसाहटों में स्वास्थ्य स्क्रीनिंग कार्य का विधिवत शुभारंभ किया गया। अभियान के प्रथम चरण में बलरामपुर विकासखंड के ग्राम चिलमा (खुर्द), सेक्टर पस्ता, राजपुर विकासखंड के ग्राम अकोराखुर्द, शंकरगढ़ विकासखंड के ग्राम डुमरपाट तथा कुसमी विकासखंड के ग्राम कछवा सहित विभिन्न पीवीटीजी क्षेत्रों में पीएम जनमन मोबाइल मेडिकल यूनिट एवं स्वास्थ्य दल द्वारा घर-घर पहुंचकर स्वास्थ्य जांच की शुरुआत की गई।
घर के द्वार पर मिल रही स्वास्थ्य सुविधा
अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग का मैदानी अमला एवं मोबाइल मेडिकल यूनिट पीवीटीजी एवं पंडो परिवारों तक सीधे पहुंच रहा है। स्वास्थ्य दल द्वारा परिवार के प्रत्येक सदस्य की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली जा रही है तथा आवश्यकतानुसार स्वास्थ्य जांच, परामर्श एवं उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इससे दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में निवासरत ऐसे परिवार, जिन्हें स्वास्थ्य संस्थाओं तक पहुंचने में कठिनाई होती है, उन्हें घर के नजदीक ही स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।
ग्राम चिलमा (खुर्द) में अभियान के शुभारंभ अवसर पर पंचायत सरपंच, एएनएम, विकासखंड समन्वयक, मितानिन एवं स्वास्थ्य दल की उपस्थिति में पीवीटीजी परिवारों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की गई। स्वास्थ्य कर्मियों ने परिवार के सदस्यों से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी लेकर लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करते हुए समय पर जांच एवं उपचार कराने के लिए भी प्रेरित किया गया।
बीमारी की समय पर पहचान और बेहतर उपचार
सार्वभौमिक स्वास्थ्य जांच अभियान का मुख्य उद्देश्य पीवीटीजी एवं पंडो परिवारों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान कर आवश्यक उपचार एवं स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। स्वास्थ्य स्क्रीनिंग के दौरान यदि किसी व्यक्ति में गंभीर अथवा संदिग्ध बीमारी के लक्षण पाए जाते हैं, तो उसे उच्च स्वास्थ्य संस्था में आवश्यक जांच एवं उपचार के लिए रेफर किया जाएगा।इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की समय रहते पहचान होने के साथ ही जरूरतमंद मरीजों को उचित स्वास्थ्य संस्था तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। अभियान के माध्यम से सामान्य स्वास्थ्य जांच से लेकर आवश्यक परामर्श एवं उपचार तक स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
मोबाइल मेडिकल यूनिट बनेगी स्वास्थ्य सेवाओं की कड़ी
जिले के कई पीवीटीजी एवं पंडो परिवार दूरस्थ वनांचल एवं दुर्गम क्षेत्रों में निवास करते हैं। ऐसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को नियमित रूप से पहुंचाना शासन प्रशासन की महत्वपूर्ण प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से पीएम जनमन मोबाइल मेडिकल यूनिट को अभियान से जोड़ा गया है। मोबाइल मेडिकल यूनिट एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम निर्धारित ग्रामों एवं बसाहटों में पहुंचकर परिवारों की स्क्रीनिंग करेगी और आवश्यकतानुसार स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराएगी।
इस पहल से स्वास्थ्य संस्थाओं से भौगोलिक दूरी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रहने वाले परिवारों को विशेष लाभ मिलेगा।
मोबाइल एप के माध्यम से रियल-टाइम होगी निगरानी
अभियान में डिजिटल मॉनिटरिंग एवं रियल-टाइम रिपोर्टिंग की व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य दल द्वारा घर-घर की गई स्वास्थ्य जांच एवं स्क्रीनिंग की जानकारी संबंधित स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा मोबाइल एप के माध्यम से रियल-टाइम दर्ज की जाएगी।इस डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से यह जानकारी प्राप्त की जा सकेगी कि कितने परिवारों की स्क्रीनिंग पूर्ण हुई, कितने लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता है और किन हितग्राहियों को आगे उपचार अथवा फॉलोअप की जरूरत है। इससे अभियान की प्रगति की नियमित निगरानी के साथ-साथ जरूरतमंद परिवारों के स्वास्थ्य संबंधी मामलों में समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।
प्रत्येक पात्र परिवार तक पहुंचने का लक्ष्य
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विजय कुमार सिंह ने स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले को निर्देशित किया है कि अभियान के अंतर्गत पीवीटीजी एवं पंडो समुदाय के प्रत्येक पात्र परिवार तक स्वास्थ्य टीम की पहुंच सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा है कि कोई भी पात्र परिवार स्वास्थ्य जांच एवं आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहे, इसके लिए मैदानी स्तर पर समन्वय के साथ कार्य किया जाए।
उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देशित किया है कि घर-घर पहुंचकर परिवारों की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी लें तथा आवश्यकता के अनुसार उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ें। गंभीर अथवा संदिग्ध मामलों में तत्काल आवश्यक कार्रवाई करते हुए उच्च स्वास्थ्य संस्थाओं में रेफरल सुनिश्चित की जाए।











