

12 अगस्त 2026 को सावन अमावस्या के दिन वर्ष का दूसरा सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। खगोलीय दृष्टि से यह एक महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है। वहीं वैदिक ज्योतिष के अनुसार इस दौरान सूर्य, चंद्रमा और राहु की विशेष स्थिति से ग्रहण योग बनेगा, जिसे ज्योतिष में संवेदनशील माना जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में कुछ लोगों को मानसिक तनाव, निर्णय लेने में भ्रम, आर्थिक चुनौतियां और कार्यों में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।
क्या है ग्रहण योग और क्यों माना जाता है महत्वपूर्ण?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य या चंद्रमा का संबंध राहु या केतु से बनता है, तब ग्रहण योग का निर्माण होता है। ऐसी स्थिति को आत्मविश्वास, स्वास्थ्य और निर्णय क्षमता पर प्रभाव डालने वाला माना जाता है। इस बार सूर्य ग्रहण कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में रहेगा, इसलिए कुछ राशियों के लिए विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है।
कर्क राशि वालों के लिए बढ़ सकती है मानसिक चिंता
ग्रहण का प्रभाव कर्क राशि पर अधिक माना जा रहा है क्योंकि यह इसी राशि में घटित होगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दौरान मानसिक तनाव, अनजाना भय और रिश्तों में गलतफहमियां बढ़ सकती हैं। आर्थिक मामलों में जल्दबाजी से बचने और अनावश्यक यात्रा टालने की सलाह दी जाती है।
सिंह राशि के जातक कार्यस्थल पर रहें सतर्क
सिंह राशि के स्वामी सूर्य माने जाते हैं। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार ग्रहण के दौरान कार्यक्षेत्र में विवाद, वरिष्ठ अधिकारियों से मतभेद या किसी करीबी से गलतफहमी की स्थिति बन सकती है। ऐसे समय में अपने काम पर ध्यान केंद्रित रखने और गोपनीय बातें साझा करने से बचने की सलाह दी जाती है।
कन्या राशि के लिए आर्थिक फैसलों में सावधानी जरूरी
कन्या राशि के जातकों के लिए यह समय आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी मामलों में सतर्क रहने का संकेत माना जा रहा है। निवेश से जुड़े फैसले सोच-समझकर लेने चाहिए। साथ ही किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले उसे अच्छी तरह पढ़ना और वाहन चलाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतना बेहतर माना जाता है।
भारत में नहीं दिखेगा सूर्य ग्रहण, सूतक काल भी नहीं होगा मान्य
यह पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। भारतीय समयानुसार ग्रहण रात में होगा और इसकी दृश्यता भारत में नहीं रहेगी। इसी कारण धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां सूतक काल प्रभावी नहीं माना जाएगा। सामान्य पूजा-पाठ, मंदिरों के कपाट और धार्मिक गतिविधियों पर किसी विशेष प्रतिबंध की आवश्यकता नहीं होगी।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार किए जाने वाले उपाय
जिन लोग वैदिक ज्योतिष में आस्था रखते हैं, वे ग्रहण के दौरान या उसके बाद कुछ पारंपरिक उपाय कर सकते हैं।
- सूर्य देव की आराधना करते हुए आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना जाता है।
- सावन अमावस्या होने के कारण 'ऊं नमः शिवाय' और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने की भी मान्यता है।
- ग्रहण के बाद जरूरतमंद लोगों को हरी मूंग, गुड़, लाल वस्त्र या तांबे के पात्र का दान करना शुभ माना जाता है।
ध्यान दें
ग्रहण से जुड़े प्रभाव और उपाय वैदिक ज्योतिष तथा धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जाता। खगोलीय घटना के रूप में सूर्य ग्रहण एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जबकि उसके शुभ या अशुभ प्रभावों को लेकर अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं।











