

लखनपुर/ प्रिंस सोनी: लखनपुर का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अपने कार्यप्रणाली को लेकर वैसे तो हमेशा सुर्खियों का कारण बनता रहा है परंतु इस बार अस्पताल प्रबंधन अपने कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर लोगो के बीच चर्चा का का विषय बना हुआ है जहाँ आकाशीय बिजली गिरने से घायल स्थानीय तीन लोगो ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

दरअसल यह पूरा मामला ग्राम केंवरी का है जहाँ एक घर में विनोद करियाम गोरता निवासी, वीरेंद्र कुमार लोकनाथ भरतपुर निवासी काम कर रहे थे उसी समय मौसम बदला और गरज चमक के साथ बारिश होने लगी इसी दौरान घर के अंदर वज्रपात हुआ जिसके बाद काम कर रहे तीनो लोग घायल हो गए जिसमें तीनो को लखनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। अस्पताल तक पहुचने में भी पहली और सबसे बड़ी समस्या यह रही की परिवारजनों के द्वारा कई बार 108 संजीवनी एम्बुलेंस पर कॉल लगाने के बाद भी यह कहा गया की अभी एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं है और अंबिकापुर से कुछ समय बाद आ पाएगी बाद इसके परिवारजनों ने निजी वाहन से तीनो व्यक्तियों को लखनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया। जिस समय तीनो घायलों को बेहोशी की हालत में लखनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया उस समय मौके पर कोई भी चिकित्सक मौजूद नहीं था साथ ही एक स्टाफ नर्स ही सभी मरीजों का देखभाल कर रही थी। एक तरफ जहां नियमानुसार दो से तीन स्टाफ नर्स की उपलब्धता होनी चाहिए उस समय में केवल एक स्टाफ नर्स के भरोसे पूरा अस्पताल चल रहा था वहीं अगर डॉक्टर की बात की जाए तो ड्यूटी डॉक्टर भी उस समय मौके पर उपस्थित नहीं थे। करीब आधे घंटे के इंतज़ार के बाद ड्यूटी डॉक्टर आए जिसके बाद इलाज प्रारंभ हो सका। हालांकि अब इलाज के बाद तीनो घायलों को हालत स्थिर है और तीनो खतरे से बाहर हैं परंतु ये सारी बातें कही न कही स्वास्थ्य व्यवस्था और अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। अगर स्वास्थ्य व्यवस्था इस तरह कमजोर है तो लोगो को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के सरकार के वादों का क्या होगा? अगर आपातकालीन स्थिति में लोगो को एंबुलेंस की सुविधा न मिले,और अगर मरीज किसी तरह अस्पताल पहुंच भी जाए और वहा कोई डॉक्टर न हो तो ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य सुविधाओं की धरातल पर स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। ऐसी स्थिती में अगर किसी व्यक्ति की जान चली जाती तो आख़िर उसका ज़िम्मेदार कौन होता अस्पताल प्रबंधन या प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था।
इस मामले में लखनपुर बीएमओ डॉक्टर ओ पी प्रसाद ने एक नपा तुला बयान दिया उन्होंने कहा की हमारे यहाँ ओपीडी तक सभी डॉक्टर रहते हैं और आपातकालीन समय में भी डॉक्टर रहते हैं अगर कभी डॉक्टर नहीं मिले तो दूसरे डॉक्टर मरीजों का उपचार कर लेते हैं। एम्बुलेंस के विषय में उन्होंने कहा कि अपने पास 108 की सुविधा उपलब्ध है। कहीं और चले जाने के कारण शायद सुविधाएं नहीं मिल पायी।स्टाफ नर्स की उपलब्धता पर बीएमओ ने कहा कि स्टाफ नर्स की उपलब्धता रोस्टर के हिसाब से समायोजित किया जाता है जिसके बाद प्रत्येक शिफ्ट के अनुसार दो दो स्टाफ नर्स ड्यूटी में रहती हैं पर एक स्टाफ नर्स प्रसव में रही होगी। अगर कोई अनुपस्थित है तो जानकारी के बाद ही अनुपस्थित रहती है। वही सीएमएचओ पीएस मार्को ने मामले की जांच कर कार्यवाही की बात कही है। बीएमओ के इस प्रकार के कथन के बाद एक बात तो स्पष्ट हो जाती है की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में कहीं न कहीं कमी तो है परंतु स्वास्थ्य विभाग अपनी कमियों को व्यवस्था का हवाला देकर छुपाने में लगा हुआ है। एक तरफ़ बेहतर व्यवस्था की बात की जाती है तो वही दूसरी ओर समय पर सही परिवहन व्यवस्था नहीं मिल पाना,डॉक्टर का अनुपस्थित होना कई सवालों को जन्म देता है। फ़िलहाल अपने इस कार्यप्रणाली को लेकर अब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एक बार फिर लोगो के बीच चर्चा का विषय बन गया है जहाँ लोग स्वास्थ व्यवस्था को लेकर सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक लोगो को समय पर बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था मिल पाएगी या फिर इसी सिस्टम के भरोसे लोगो को हमेशा एक बेहतर स्वास्थ्य की उम्मीद लिए जीना होगा।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ पी एस मारको से इस संबंध में चर्चा करने पर उनके द्वारा कहा गया की बीएमओ से जांच करवाता हु ड्यूटी से नदारत रहने पर डॉक्टर और स्टाफ पर कार्रवाई की जाएगी।











