

रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) से जुड़े कथित घोटाले में कारोबारी अनवर ढेबर को सुप्रीम कोर्ट से सशर्त अंतरिम जमानत मिल गई है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि मुकदमे की सुनवाई पूरी होने तक उन्हें छत्तीसगढ़ से बाहर रहना होगा। जेल से रिहा होने के बाद राज्य छोड़ना इस जमानत की प्रमुख शर्तों में शामिल है।
रहने का पता और मोबाइल नंबर देना होगा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि छत्तीसगढ़ छोड़ने से पहले अनवर ढेबर को अपना वर्तमान पता और मोबाइल नंबर संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराना होगा। साथ ही जब भी ट्रायल कोर्ट उन्हें पेश होने के लिए बुलाएगी, उन्हें अनिवार्य रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा।
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने की।
गवाहों को प्रभावित करने की आशंका पर लगी शर्त
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि यदि अनवर ढेबर छत्तीसगढ़ में रहते हैं तो गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका बनी रह सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को ध्यान में रखते हुए राज्य से बाहर रहने की शर्त लगाई। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि संबंधित अधिकारियों के पास उनका वर्तमान संपर्क विवरण उपलब्ध होना चाहिए।
दोनों पक्षों ने रखे अपने तर्क
सुनवाई के दौरान अनवर ढेबर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पक्ष रखा, जबकि छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने पैरवी की।
हाई कोर्ट पहले खारिज कर चुका था जमानत
इससे पहले 13 मई को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनवर ढेबर की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि उपलब्ध रिकॉर्ड प्रथम दृष्टया राज्य के एक सरकारी निगम में संगठित भ्रष्टाचार की ओर संकेत करते हैं। अदालत ने यह भी टिप्पणी की थी कि सार्वजनिक धन से जुड़े आर्थिक अपराध गंभीर प्रकृति के होते हैं और ऐसे मामलों में जमानत पर निर्णय लेते समय विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है।
क्या है CSMCL घोटाला
इस मामले की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा भारतीय दंड संहिता तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत की जा रही है।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि निगम में मैनपावर सप्लाई एजेंसियों के बिल और बकाया भुगतान मंजूर कराने के बदले कथित तौर पर अवैध कमीशन लिया जाता था। दावा है कि यह राशि बिचौलियों के माध्यम से संबंधित लोगों तक पहुंचाई जाती थी। जांच में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर एजेंसियों का कहना है कि कई एजेंसियों पर भुगतान जारी कराने के लिए कथित रूप से कमीशन देने का दबाव बनाया जाता था। इसी मामले में अनवर ढेबर समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है।










