

रायपुर। प्रदेश के बहुचर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में एक अहम कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। मामले में दोषी करार दिए गए शूटर चिमन सिंह को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है। उम्रकैद की सजा के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने यह राहत दी, जिसके बाद उसकी रिहाई की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता खुल गया है।
उम्रकैद के फैसले को दी थी चुनौती
चिमन सिंह ने रायपुर जिला अदालत द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इसी अपील पर सुनवाई करते हुए अदालत ने उसे अंतरिम जमानत प्रदान की। हालांकि, मामले की अंतिम सुनवाई अभी शेष है और दोषसिद्धि पर अंतिम निर्णय बाद में होगा।
2007 में कई आरोपियों को हुई थी सजा
इस चर्चित हत्याकांड में वर्ष 2007 में रायपुर जिला अदालत ने चिमन सिंह, याह्या ढेबर, एएस गिल सहित कई पुलिस अधिकारियों समेत कुल 28 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वहीं अमित जोगी को उस समय जिला अदालत ने बरी कर दिया था। बाद में हाईकोर्ट ने उन्हें भी दोषी माना, लेकिन उस निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा रखी है।
दिनदहाड़े हुई थी हाई-प्रोफाइल हत्या
चार जून 2003 को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के तत्कालीन प्रदेश कोषाध्यक्ष रामअवतार जग्गी की रायपुर के मौदहापारा थाना क्षेत्र में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे छत्तीसगढ़ में सनसनी फैला दी थी और यह राज्य के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल हो गई थी।
एक बार फिर सुर्खियों में आया मामला
सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम जमानत के बाद यह पुराना मामला फिर चर्चा का विषय बन गया है। अब कानूनी और राजनीतिक हलकों की नजरें सर्वोच्च अदालत में लंबित अपील की अंतिम सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस बहुचर्चित मामले की आगे की दिशा तय होगी।











