नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक सोमवार से शुरू हो रही है। 5 अगस्त को होने वाले नीतिगत फैसले से पहले निवेशक और अर्थशास्त्री महंगाई, आर्थिक विकास और ब्याज दरों के भविष्य के रुख पर केंद्रीय बैंक के आकलन को लेकर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। अनिश्चित वैश्विक माहौल के बीच इस बैठक से ब्याज दरों, तरलता की स्थिति और व्यापक अर्थव्यवस्था के आउटलुक को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिलने की उम्मीद है।

विश्लेषकों का मत

कई विश्लेषकों का मानना है कि छह सदस्यों वाली मौद्रिक नीति समिति जून की बैठक की तरह ही नीतिगत रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखेगी। एसबीआई रिसर्च के अनुसार, RBI के नीतिगत दरों को जस का तस रखने की संभावना इसलिए ज्यादा है क्योंकि अगले दो तिमाहियों में उपभोक्ता मूल्य मुद्रास्फीति (महंगाई) के 5 प्रतिशत से ऊपर रहने का अनुमान है, जबकि घरेलू आर्थिक गतिविधियों में मजबूती के संकेत दिख रहे हैं।

एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट क्या कहती है ?

एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1) में जीडीपी वृद्धि 7 प्रतिशत से अधिक रह सकती है, जो पहले के अनुमानों से बेहतर है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, रुपये पर दबाव और बाहरी पूंजी प्रवाह को लेकर सावधानी को देखते हुए केंद्रीय बैंक की ओर से स्पष्ट रूप से ‘डोविश’ (नरम) रुख वाला संदेश मिलने की संभावना कम है। हालांकि, जुलाई में मजबूत पूंजी प्रवाह, विदेशी मुद्रा भंडार में सुधार, बेहतर मानसून और जलाशयों के सामान्य स्तर के कारण घरेलू बुनियादी हालात सुधरे हैं।

मौद्रिक नीति की भविष्य की दिशा के बारे में संकेत

जून में हुई पिछली नीति समीक्षा में RBI ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखा था और अपना नीतिगत रुख न्यूट्रल रखा था। साथ ही, भू-राजनीतिक तनाव के बीच वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान संशोधित कर 6.6 प्रतिशत कर दिया गया था। बाजार भी महंगाई के जोखिम, विकास की संभावनाओं और वैश्विक घटनाक्रमों पर RBI की टिप्पणियों पर गौर करेगा ताकि मौद्रिक नीति की भविष्य की दिशा के बारे में संकेत मिल सकें।

Leave a reply

Please enter your name here
Please enter your comment!