

Sudhanshu Trivedi in Rajya Sabha: संसद के उच्च सदन में गुरुवार को गोमूत्र को लेकर छिड़ा विवाद राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी की एक टिप्पणी के बाद भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया। इसी मुद्दे पर भाजपा के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने सदन में कांग्रेस पर जमकर हमला बोला और भारतीय परंपरागत ज्ञान तथा वैज्ञानिक शोधों का हवाला देते हुए अपनी बात रखी।
प्रियंका गांधी की टिप्पणी के बाद बढ़ा सियासी तापमान
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कथित रूप से राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में सुधार के लिए गठित टास्क फोर्स के सदस्य प्रो. वी. कामकोटि को लेकर टिप्पणी की। इस बयान के सामने आने के बाद भाजपा ने इसे विद्वानों और भारतीय ज्ञान परंपरा का अपमान बताया।मामला जल्द ही संसद तक पहुंच गया, जहां भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के रुख पर सवाल खड़े किए।
गोमूत्र के वैज्ञानिक पहलुओं का दिया हवाला
राज्यसभा में बोलते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि जिन लोगों को गोमूत्र को लेकर आपत्ति है, उन्हें इससे जुड़े वैज्ञानिक अध्ययनों और शोधों की जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि गोमूत्र के एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और औषधीय गुणों को लेकर अमेरिका में पेटेंट भी दिए गए हैं।उन्होंने कहा कि इस विषय पर चर्चा करते समय पूर्वाग्रहों से ऊपर उठकर तथ्यों और शोधों को देखना चाहिए। त्रिवेदी ने विपक्ष पर भारतीय परंपरागत ज्ञान को कमतर आंकने का आरोप भी लगाया।
भारतीय ज्ञान परंपरा को नजरअंदाज करने का लगाया आरोप
भाजपा सांसद ने अपने संबोधन में कहा कि यदि देश ने समय रहते आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को पर्याप्त महत्व दिया होता, तो भारत वैश्विक स्तर पर और मजबूत स्थिति में खड़ा होता।उन्होंने हल्दी, नीम और तुलसी जैसे पारंपरिक उत्पादों से जुड़े पेटेंट विवादों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत को अपने ज्ञान संसाधनों की पहचान और संरक्षण पहले ही कर लेना चाहिए था।
टास्क फोर्स की चर्चा में गोमूत्र का क्या संबंध?
सुधांशु त्रिवेदी ने यह भी सवाल उठाया कि परीक्षा सुधारों और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर गठित विशेषज्ञ समिति की चर्चा के दौरान गोमूत्र का विषय आखिर क्यों लाया गया। उन्होंने कहा कि यह विषय उस संदर्भ से पूरी तरह अलग था और इसका समिति के कार्य से कोई सीधा संबंध नहीं था।उनके अनुसार, विशेषज्ञों और शिक्षाविदों के योगदान पर चर्चा करते समय व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचना चाहिए और विषय की गंभीरता को बनाए रखना चाहिए।
पेपर लीक और शिक्षा सुधारों पर भी की टिप्पणी
सदन में बोलते हुए भाजपा सांसद ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी चुनौतियों से निपटने और परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।इस पूरे घटनाक्रम के बाद गोमूत्र को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में इस पर भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।











