मध्य प्रदेश :  मऊगंज उपजेल से सामने आए एक मामले ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ बंदियों के परिजनों ने जेल प्रहरी तेजवीर शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि जेल प्रहरी नशे की हालत में बंदियों के साथ मारपीट करता है और मुलाकात के नाम पर पैसों की मांग भी की जाती है।परिजनों का कहना है कि पैसे नहीं देने पर बंदियों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया जाता है। इन आरोपों के सामने आने के बाद प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

सफाई के दौरान हुआ विवाद, बंदियों ने दिखाई चोटों के निशान

परिजनों के मुताबिक जेल परिसर में साफ सफाई का काम चल रहा था। इसी दौरान आठ बंदी कंबल लेकर बाहर बैठे हुए थे। आरोप है कि तभी जेल प्रहरी तेजवीर शर्मा वहां पहुंचे और अचानक बंदियों पर लाठी से हमला कर दिया।जब परिजन मुलाकात के लिए जेल पहुंचे तो बंदियों ने अपने शरीर पर लगी चोटों के निशान दिखाए। परिजनों का दावा है कि बंदियों ने पूरी घटना बताते हुए उनके साथ हुई कथित मारपीट की जानकारी दी, जिसके बाद परिवारों में नाराजगी फैल गई।

कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर परिजनों ने मांगी निष्पक्ष जांच

घटना के बाद बंदियों के परिजन कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और लिखित शिकायत देकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि जेल जैसी जगह पर भी यदि बंदियों की सुरक्षा पर सवाल उठते हैं, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।परिजनों ने मांग की है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

गुमनाम कर्मचारी के दावों से बढ़ा विवाद

इस मामले के बीच जेल के एक कर्मचारी ने पहचान सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर कुछ और गंभीर आरोप लगाए हैं। कर्मचारी ने दावा किया कि जेलों में मुलाकात के नाम पर अवैध पैसे लेने और प्रतिबंधित सामान पहुंचाने जैसी गतिविधियां होती हैं।हालांकि, इन दावों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासनिक जांच के बाद ही इनकी वास्तविकता सामने आ सकेगी।

जेल प्रशासन ने जांच और मेडिकल रिपोर्ट का दिया हवाला

मऊगंज उपजेल के प्रभारी जेलर ध्रुव नारायण मिश्रा ने बताया कि मामले की जानकारी मिलने के बाद सभी आठ बंदियों का मेडिकल परीक्षण कराया गया है। साथ ही उनके बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।उन्होंने बताया कि संबंधित जेल प्रहरी तेजवीर शर्मा को नोटिस जारी कर दिया गया है और पूरी रिपोर्ट जेल के पदेन अधीक्षक एसडीएम को भेजी गई है। जांच रिपोर्ट और मेडिकल परीक्षण के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जेल व्यवस्था और जवाबदेही पर उठे बड़े सवाल

इस पूरे मामले ने केवल एक जेल प्रहरी पर लगे आरोपों तक सीमित नहीं रहकर जेल व्यवस्था की पारदर्शिता और बंदियों के अधिकारों पर बहस शुरू कर दी है।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वास्तव में बंदियों के साथ मारपीट हुई? क्या मुलाकात के नाम पर अवैध वसूली के आरोपों में कोई सच्चाई है? क्या ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरती गई?इन सभी सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

जांच रिपोर्ट का इंतजार, प्रशासन की कार्रवाई पर नजर

फिलहाल परिजनों की शिकायत, बंदियों का मेडिकल परीक्षण और जेल प्रहरी को जारी नोटिस के बाद पूरे मामले की जांच जारी है। मऊगंज जिले की नजर अब प्रशासनिक रिपोर्ट पर टिकी हुई है।यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला सिर्फ एक कर्मचारी की गलती नहीं, बल्कि जेल प्रशासन की व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

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