

छत्तीसगढ़ : सरकार की ओर से शिक्षकों और कर्मचारियों के संलग्नीकरण समाप्त करने के स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद बिलासपुर जिले में स्थिति अब भी जस की तस बनी हुई है। आदेशों के बाद भी तीन दर्जन से अधिक शिक्षक और कर्मचारी विभिन्न कार्यालयों में अटैच रहकर काम कर रहे हैं, जबकि कई सरकारी स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं।
34 शिक्षक-कर्मचारी अब भी मूल पदस्थापना से बाहर
जानकारी के अनुसार, बिलासपुर जिले के अलग-अलग सरकारी कार्यालयों में फिलहाल 34 शिक्षक और कर्मचारी संलग्नीकरण के आधार पर कार्यरत हैं। इससे पहले प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी का कार्यभार संभालने के बाद 38 शिक्षकों और कर्मचारियों को उनकी मूल पदस्थापना पर भेजा गया था, लेकिन शेष कर्मचारियों का संलग्नीकरण अब तक समाप्त नहीं हो सका है।
स्कूलों में शिक्षक कम, दफ्तरों में निभा रहे जिम्मेदारी
जिले के कई सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। इसके बावजूद मस्तूरी, बिल्हा और अन्य विकासखंडों के कई शिक्षकों को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, कलेक्टोरेट, तहसील कार्यालय, जिला निर्वाचन शाखा और जनप्रतिनिधियों के कार्यालयों में विभिन्न प्रशासनिक कार्यों में लगाया गया है।सूत्रों के अनुसार, कई शिक्षकों से डेटा एंट्री और अन्य गैर-शैक्षणिक कार्य भी कराए जाते रहे हैं, जिससे स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
अधिकारियों पर उठ रहे सवाल
शिक्षकों को उनकी मूल पदस्थापना पर वापस नहीं भेजे जाने को लेकर विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कुछ कर्मचारियों को कार्यालयों में बनाए रखने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
छात्रावासों और अन्य कार्यालयों में भी जारी है व्यवस्था
जानकारी के मुताबिक शिक्षा विभाग और आदिवासी विकास विभाग के छात्रावासों में भी कई शिक्षक और कर्मचारी अब तक अटैच हैं। वहीं कुछ जनप्रतिनिधियों के कार्यालयों में भी शिक्षकों की सेवाएं लिए जाने की चर्चा है।
डीईओ ने संचालनालय को बताई व्यावहारिक परेशानी
लोक शिक्षण संचालनालय की ओर से संलग्नीकरण समाप्त करने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को कई बार पत्र भेजे जा चुके हैं। इसके बावजूद प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी अजय कौशिक ने संचालनालय को पत्र लिखकर बताया है कि छात्रावासों में कार्यरत अटैच कर्मचारियों को तत्काल वापस भेजने में व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आ रही हैं।
सरकारी आदेश और जमीनी हकीकत में अंतर
एक ओर सरकार स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर बिलासपुर में बड़ी संख्या में शिक्षक अब भी गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगे हुए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि संलग्नीकरण समाप्त करने के सरकारी आदेशों का वास्तविक लाभ स्कूलों और विद्यार्थियों तक कब पहुंचेगा।










