छत्तीसगढ़ : आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों, रेबीज के खतरे और राष्ट्रीय व राज्य राजमार्गों पर घूमते आवारा मवेशियों से हो रहे हादसों को लेकर बिलासपुर हाई कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यह मामला सीधे आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन और लगातार निगरानी भी जरूरी है।

22 सितंबर तक मुख्य सचिव को देना होगा नया शपथपत्र

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच के समक्ष मुख्य सचिव ने राज्य सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों की जानकारी शपथपत्र के माध्यम से प्रस्तुत की। अदालत ने इन प्रयासों पर संतोष जताते हुए मुख्य सचिव को 22 सितंबर 2026 तक नई प्रगति रिपोर्ट और ताजा शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।

आवारा कुत्तों के नियंत्रण के लिए करोड़ों रुपये की योजना

राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि आवारा पशुओं और कुत्तों के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए 33.98 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत की गई है। इसमें पशुपालन विभाग को 3.98 करोड़ रुपये और नगरीय प्रशासन विभाग को 30 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।प्रदेश में फिलहाल 34 एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर संचालित हैं। 32 जिलों में कम से कम एक एबीसी सेंटर कार्यरत है, जबकि गरियाबंद जिले में नया केंद्र निर्माणाधीन है। इसके अलावा 199 डॉग शेल्टर भी संचालित किए जा रहे हैं, जिनकी कुल क्षमता 4,340 कुत्तों की है।

हजारों कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण

30 जून 2026 तक राज्य में 30,651 आवारा कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है। इसके अलावा 50,362 कुत्तों को एंटी-रेबीज टीका लगाया गया है, जबकि 42,263 कुत्तों को डी-वॉर्मिंग यानी पेट के कीड़ों की दवा दी गई है।

राजमार्गों से हटाए गए डेढ़ लाख से ज्यादा मवेशी

सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए राज्य सरकार ने 251 संवेदनशील स्थानों की पहचान की है। निगरानी के लिए 644 पेट्रोलिंग दल, 28 एम्बुलेंस और 7 क्रेन तैनात की गई हैं।सरकार के अनुसार अब तक 1,53,351 आवारा मवेशियों को सड़कों से हटाकर 137 गौशालाओं, 42,112 कैटल शेल्टर और अन्य गोधामों में भेजा जा चुका है।

स्कूलों और अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत राज्य में 51,160 सार्वजनिक संस्थानों की पहचान की गई है। इनमें से 44,204 स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक परिसरों में बाउंड्रीवॉल, फेंसिंग या गेट लगाकर आवारा पशुओं और कुत्तों के प्रवेश को रोकने की व्यवस्था की गई है।इसके साथ ही आवारा कुत्तों के लिए 2,593 निर्धारित फीडिंग स्पेस भी बनाए गए हैं।

हेल्पलाइन पर आई हजारों शिकायतें

'निदान' हेल्पलाइन (1100) और एनएचएआई हेल्पलाइन (1033) पर अब तक 9,045 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें से 8,895 शिकायतों का समाधान किए जाने की जानकारी राज्य सरकार ने अदालत को दी।

हाई कोर्ट ने दिए सख्त निर्देश

अदालत ने मुख्य सचिव को पूरे अभियान की नियमित समीक्षा करने, सभी जिलों में एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स-2023 का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने तथा अगली सुनवाई से पहले जिलेवार प्रगति, नसबंदी और टीकाकरण के अद्यतन आंकड़े तथा हेल्पलाइन शिकायतों की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर 2026 को होगी।

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