

मध्य प्रदेश : विधानसभा ने लंबे समय से प्रतीक्षित अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक को मंजूरी दे दी है। मंगलवार को करीब साढ़े पांच घंटे चली चर्चा के बाद सदन ने इस महत्वपूर्ण विधेयक सहित कुल आठ विधेयकों को पारित किया। नए कानून का उद्देश्य केवल आग बुझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आग लगने की घटनाओं की रोकथाम और जवाबदेही तय करना भी है।
फायर सर्विस को मिलेगा अत्यावश्यक सेवा का दर्जा
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सदन में बताया कि यह विधेयक विभिन्न राज्यों और केंद्र के कानूनों का अध्ययन करने के बाद तैयार किया गया है। इसके तहत अग्निशमन सेवाओं को अत्यावश्यक सेवा की श्रेणी में शामिल किया जाएगा। साथ ही प्रदेश में फायर सेफ्टी संचालनालय और राज्य स्तरीय प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना भी की जाएगी।
आग लगने पर अधिकारियों और भवन मालिकों की भी होगी जवाबदेही
नए कानून के तहत यदि किसी भवन में आग लगने की घटना होती है और जांच में यह सामने आता है कि फायर सेफ्टी के निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया था, तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होगी। इसके साथ ही भवन मालिक को भी जवाबदेह माना जाएगा।
15 मीटर से ऊंची इमारतों के लिए NOC अनिवार्य
विधेयक के अनुसार 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली सभी इमारतों के लिए फायर सेफ्टी की अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी NOC लेना अनिवार्य होगा। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश में पर्याप्त संख्या में फायर स्टेशन और दमकल वाहन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि शहरी क्षेत्रों में 10 मिनट और ग्रामीण इलाकों में 20 मिनट के भीतर दमकल की टीम घटनास्थल तक पहुंच सके।
पंडालों और स्कूलों पर भी लागू होंगे नए नियम
भाजपा विधायक अभिलाष पांडे ने विधेयक का समर्थन करते हुए बताया कि अब सार्वजनिक पंडालों के लिए भी फायर सेफ्टी की अनुमति लेना जरूरी होगा। इसके अलावा स्वैच्छिक अग्निशमन कार्यकर्ताओं का भी प्रावधान किया गया है। झूठी आग लगने की सूचना देने वालों पर आर्थिक दंड लगाया जाएगा। वहीं स्कूलों के लिए भी फायर सेफ्टी NOC के स्पष्ट मानक निर्धारित किए गए हैं।










