

रायपुर। मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट को लेकर सियासत तेज हो गई है। योजना की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों के बीच अब कांग्रेस ने भी सरकार पर निशाना साधा है। जगदलपुर पहुंचे पूर्व मंत्री मोहन मरकाम ने आरोप लगाया कि सरकार बदलने के बाद मोबाइल मेडिकल यूनिट की बसों का रंग और प्रचार सामग्री तो बदल दी गई, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं की मूल समस्याएं अब भी जस की तस बनी हुई हैं।
डॉक्टरों और दवाओं की कमी का लगाया आरोप
मोहन मरकाम ने कहा कि वर्ष 2020 में तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार ने इस योजना की शुरुआत इस उद्देश्य से की थी कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों को उनके घर के पास निशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। उनका आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों से प्रदेश के विभिन्न जिलों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि मोबाइल मेडिकल यूनिट में डॉक्टरों, दवाओं और जरूरी संसाधनों की भारी कमी है। इसके कारण मरीजों को समय पर उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है।
बसों का रंग बदला, व्यवस्था नहीं
पूर्व मंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने मोबाइल मेडिकल यूनिट की बसों का रंग बदलने के साथ उन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की तस्वीरें लगा दीं, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में अपेक्षित प्रयास दिखाई नहीं दे रहे हैं। उनका कहना है कि डॉक्टरों की कमी और जरूरी सुविधाओं का अभाव अब भी बना हुआ है।
पैथोलॉजी जांच पर भी उठाए सवाल
मोहन मरकाम ने दावा किया कि कई स्थानों पर सीबीसी जांच मशीनें खराब हैं, जिससे मरीजों को जांच सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय मोबाइल मेडिकल यूनिट में 42 प्रकार की पैथोलॉजी जांच की सुविधा उपलब्ध थी, जबकि अब कई क्षेत्रों में पूरी जांच व्यवस्था संचालित नहीं हो रही है। उन्होंने प्रशासन से संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
भुगतान पूरा, निगरानी नहीं
मरकाम ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार संबंधित कंपनी को हर महीने पूरा भुगतान कर रही है, लेकिन जिन क्षेत्रों से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं, वहां निरीक्षण और निगरानी की प्रभावी व्यवस्था नहीं दिखाई दे रही है। उनके मुताबिक इससे योजना के संचालन और सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।










