रायपुर। विश्वविख्यात पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई के निधन पर पूरे देश में शोक की लहर है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई राष्ट्रीय नेताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। इस बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने घोषणा की है कि तीजन बाई का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने किया राजकीय सम्मान का ऐलान

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि तीजन बाई केवल एक महान लोक कलाकार नहीं थीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और गौरव थीं। मुख्यमंत्री ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और उनके परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।

उन्होंने घोषणा की कि तीजन बाई की अंतिम विदाई पूरे राजकीय सम्मान के साथ होगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर शोक संदेश जारी करते हुए कहा कि तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय प्रस्तुति से छत्तीसगढ़ की पंडवानी लोककला को विश्वभर में अलग पहचान दिलाई। उन्होंने कहा कि उनका निधन भारतीय कला और संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। प्रधानमंत्री ने शोक संतप्त परिवार और उनके असंख्य प्रशंसकों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं।

राष्ट्रपति मुर्मु और अमित शाह ने भी दी श्रद्धांजलि

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी तीजन बाई के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उनके कला जगत में दिए गए अमूल्य योगदान को याद किया। दोनों नेताओं ने कहा कि भारतीय लोक संस्कृति को समृद्ध बनाने में तीजन बाई की भूमिका हमेशा याद रखी जाएगी।

राजनाथ सिंह बोले, कला जगत ने खोई अनमोल धरोहर

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि तीजन बाई ने अपनी विलक्षण गायकी और प्रभावशाली प्रस्तुति से लोककला की दुनिया में अमिट पहचान बनाई। उन्होंने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। उनका निधन कला और संगीत जगत के लिए बड़ी क्षति है।

पंडवानी को दिलाई वैश्विक पहचान

वर्ष 1956 में भिलाई के निकट गनियारी गांव में जन्मी तीजन बाई ने पंडवानी लोककला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। महाभारत की कथाओं को गायन और अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत करने की उनकी विशिष्ट शैली ने उन्हें विश्वभर में पहचान दिलाई। उन्होंने पांच दशकों से अधिक समय तक भारतीय लोक संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हुए देश और विदेश के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर प्रस्तुति दी।

देश के सर्वोच्च सम्मानों से हुईं सम्मानित

भारतीय लोककला में उनके असाधारण योगदान के लिए तीजन बाई को वर्ष 1988 में पद्मश्री, 2003 में पद्म भूषण और 2019 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी प्राप्त हुए। उनके निधन से भारतीय लोककला ने अपनी एक अमूल्य धरोहर खो दी है।

Leave a reply

Please enter your name here
Please enter your comment!