सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में वर्ष 2012 से संचालित पोटाकेबिनों में कार्यरत अनुदेशकों की भूमिका को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे हैं। जिले में कार्यरत 269 अनुदेशकों को हर साल करीब 5 करोड़ रुपये मानदेय के रूप में दिए जाते हैं, लेकिन उनके कार्य और जिम्मेदारियों को लेकर अब तक स्पष्ट व्यवस्था नहीं बन पाई है। अब प्रशासन ने व्यवस्था में सुधार के लिए पहल शुरू कर दी है।

प्रशिक्षण शिविर के जरिए तय की जा रही जिम्मेदारियां

प्रशासन ने लगभग 300 अनुदेशकों को उनके दायित्वों से अवगत कराने के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया है। प्रत्येक अनुदेशक को करीब 16 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है, जिसका भुगतान छात्रावास अधीक्षकों के माध्यम से किया जाता है।

सलवा जुडूम के समय हुई थी नियुक्ति

जानकारी के अनुसार, इन अनुदेशकों की नियुक्ति सलवा जुडूम के दौरान पोटाकेबिनों के संचालन के लिए अस्थायी व्यवस्था के रूप में की गई थी। समय के साथ यह व्यवस्था जारी रही, लेकिन उनके कार्य, दायित्व और जवाबदेही को लेकर कोई स्पष्ट व्यवस्था विकसित नहीं हो सकी। सूत्रों के मुताबिक कई स्थानों पर नियमित निगरानी नहीं होने के कारण उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहे हैं।

कलेक्टर ने दिए सख्ती के संकेत

कलेक्टर अमित कुमार ने पोटाकेबिनों की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नियमित उपस्थिति, कार्य निष्पादन और जिम्मेदारियों की निगरानी के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि केवल मानदेय लेने की व्यवस्था अब स्वीकार नहीं की जाएगी और प्रत्येक अनुदेशक को निर्धारित कार्यों का ईमानदारी से निर्वहन करना होगा।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यदि कोई अनुदेशक अपने दायित्वों में लापरवाही करता पाया गया तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी की जा सकती है।

उपस्थिति को लेकर भी उठ रहे सवाल

सूत्रों के मुताबिक कई अनुदेशक केवल कुछ घंटों के लिए संस्थान पहुंचते हैं और फिर लौट जाते हैं, जबकि उन्हें पूर्णकालिक रूप से पोटाकेबिन में रहकर अपनी जिम्मेदारियां निभानी होती हैं। यह भी बताया जा रहा है कि कई बार एक ही पोटाकेबिन में नियुक्त सभी अनुदेशक एक साथ अनुपस्थित पाए जाते हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

अब इन कार्यों पर रहेगा विशेष फोकस

प्रशिक्षण के दौरान अनुदेशकों को बच्चों में खेल प्रतिभा की पहचान कर उसे आगे बढ़ाने, सभी विद्यार्थियों की खेल गतिविधियों में भागीदारी सुनिश्चित करने और खेल भावना विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा बच्चों को सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल करने, स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को बढ़ावा देने, पर्याप्त खेल सामग्री के उपयोग को सुनिश्चित करने तथा प्रत्येक शनिवार सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया गया है।

बच्चों और अभिभावकों को भी करेंगे प्रेरित

जिला शिक्षा अधिकारी जी.आर. मंडावी ने बताया कि प्रशिक्षण शिविर में सभी अनुदेशकों को कलेक्टर का मार्गदर्शन मिला है। उन्होंने कहा कि अनुदेशकों को अपनी जिम्मेदारियों का पालन करने के साथ-साथ बच्चों और उनके अभिभावकों को शिक्षा, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रति भी प्रेरित करना होगा।

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