छत्तीसगढ़ की राजधानी Raipur और आसपास के इलाकों में प्रवर्तन निदेशालय की ताबड़तोड़ कार्रवाई ने प्रशासनिक और कारोबारी हलकों में हलचल बढ़ा दी है। DMF और कृषि विभाग से जुड़े कथित घोटालों की जांच के बीच एक बार फिर से केंद्रीय एजेंसी की सक्रियता तेज हो गई है।सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले की परतें खोलने के लिए कई जिलों में एक साथ दबिश दी गई है, जिससे जांच का दायरा और व्यापक होता दिख रहा है।

पांच जिलों में एक साथ छापेमारी से बढ़ी हलचल
ईडी ने रायपुर के साथ साथ दुर्ग, धमतरी, अंबिकापुर और महासमुंद में एक साथ कार्रवाई की है। इस समन्वित अभियान ने कई कारोबारी और ठेकेदारों को जांच के दायरे में ला दिया है।

जिन ठिकानों पर कार्रवाई हुई, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • रायपुर के वल्लभ नगर स्थित कारोबारी शाश्वत लुणावत का निवास
  • सरगुजा में मानसून एग्रो से जुड़े ठिकाने
  • धमतरी में ठेकेदार दीपेश गांधी के आवास

दस्तावेज, लेनदेन और डिजिटल रिकॉर्ड की गहन जांच
प्रवर्तन निदेशालय की टीम इन सभी स्थानों पर वित्तीय लेनदेन, दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड की बारीकी से जांच कर रही है। शुरुआती जानकारी के अनुसार कई महत्वपूर्ण कागजात और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी जांच एजेंसियों के हाथ लगे हैं।

अंबिकापुर में भी अहम खुलासों की चर्चा
अंबिकापुर में कुछ ठिकानों पर जांच के दौरान आर के सिंह और संजय गुप्ता से जुड़े स्थानों से दस्तावेज और डिजिटल डेटा बरामद होने की बात सामने आ रही है। हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है।

जिन नामों पर केंद्रित हुई जांच की परछाई
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में कई प्रभावशाली नामों के जुड़े होने की चर्चा है, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल बताए जाते हैं:

  • पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel
  • निलंबित पूर्व उपसचिव Saumya Chaurasia
  • कोयला कारोबारी सूर्यकांत तिवारी Suryakant Tiwari
  • पूर्व IAS अनिल टुटेजा Anil Tuteja
  • निलंबित IAS रानू साहू Ranu Sahu

इन नामों को लेकर यह दावा किया जा रहा है कि कई कारोबारी और ठेकेदार इनके संपर्क में रहे हैं, हालांकि जांच एजेंसियों ने अभी आधिकारिक तौर पर कोई अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है।

DMF और एग्रीकल्चर फंडिंग पर जांच का फोकस
जांच का मुख्य केंद्र जिला खनिज निधि (DMF) और कृषि विभाग से जुड़े कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं। सूत्रों का कहना है कि कई परियोजनाओं में फाइलों और जमीन पर हुए कार्यों में बड़ा अंतर पाया गया है।

कुछ मामलों में यह भी दावा किया जा रहा है कि योजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर सप्लाई और भुगतान केवल दस्तावेजों में दिखाए गए।

पुराने नेटवर्क और कारोबारी कनेक्शन की जांच
जांच एजेंसियां अब उन कथित कारोबारी नेटवर्क की भी परतें खंगाल रही हैं, जिनका संबंध प्रशासनिक अधिकारियों और ठेकेदारों से बताया जाता है। इनमें सतपाल छावड़ा और मनदीप चावला जैसे नाम भी चर्चा में हैं, जिनके DMF और हार्टीकल्चर से जुड़े कार्यों में भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

ACB EOW की पहले से चल रही जांच के बीच नई कार्रवाई
छत्तीसगढ़ की ACB-EOW पहले से ही इस पूरे मामले की जांच कर रही है। अब ईडी की सक्रियता से जांच का दायरा और गहराई दोनों बढ़ गई है।

जांच के बीच बढ़ी राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल
छापेमारी के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कई स्तरों पर इस कार्रवाई को लेकर अलग अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जबकि जांच एजेंसियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है।

आगे क्या हो सकता है बड़ा कदम
सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में बरामद दस्तावेज और डिजिटल सबूतों के आधार पर पूछताछ और भी तेज हो सकती है, जिससे इस मामले में कई नए नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

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