

मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े घटनाक्रम की चर्चाएं जोर पकड़ने लगी हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में संभावित असंतोष और दलगत खींचतान को लेकर सियासी गलियारों में अटकलों का दौर तेज हो गया है। हाल ही में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में कई सांसदों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक समीकरणों को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
बैठक में पांच सांसदों की गैरहाजिरी बनी चर्चा का विषय
सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे ने ‘मातोश्री’ में पार्टी सांसदों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में नौ में से केवल चार सांसद ही शामिल हुए, जबकि पांच सांसद अनुपस्थित रहे। इसी घटनाक्रम के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि कुछ सांसद भविष्य में किसी अन्य राजनीतिक खेमे का रुख कर सकते हैं।
अनुपस्थित रहने वाले सांसदों में संजय जाधव, संजय देशमुख, ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और नागेश पाटिल अष्टिकर के नाम प्रमुख रूप से सामने आए हैं। उनकी गैरमौजूदगी ने राजनीतिक अटकलों को और बल दे दिया है।
एकनाथ शिंदे ने किया स्पष्ट इंकार
संभावित राजनीतिक हलचल की चर्चाओं के बीच उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि उनकी ओर से किसी प्रकार की टूट या राजनीतिक अभियान चलाने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने इस तरह की खबरों को महत्व न देने की बात कही।
उद्धव ठाकरे का संदेश: जाना है तो रास्ता खुला है
दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि कोई नेता या सांसद पार्टी छोड़ना चाहता है, तो वह स्वतंत्र है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय भले ही उनके पक्ष में न हो, लेकिन राजनीति में परिस्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं रहतीं।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि संघर्ष का समय फिर आएगा और उस समय संगठन के साथ खड़े रहने वालों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
पुरानी बगावत का भी किया उल्लेख
अपने संबोधन में उद्धव ठाकरे ने चार वर्ष पहले हुए बड़े राजनीतिक घटनाक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय पार्टी के कई विधायक अलग हो गए थे, लेकिन उन्होंने किसी पर दबाव बनाने या राजनीतिक प्रतिशोध की राह अपनाने का प्रयास नहीं किया।
उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग संगठन छोड़कर गए हैं, उन्हें भविष्य में अपने फैसले पर पछतावा हो सकता है, लेकिन तब तक परिस्थितियां काफी बदल चुकी होंगी।
राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल
बैठक में कई सांसदों की अनुपस्थिति के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि अभी तक किसी सांसद ने खुलकर कोई घोषणा नहीं की है, लेकिन घटनाक्रम पर सभी दलों की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह केवल अटकलें हैं या फिर राज्य की राजनीति में कोई नया मोड़ आने वाला है।




















