

पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर बड़े राजनीतिक भूचाल की ओर बढ़ती नजर आ रही है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है, जिससे पार्टी के संसदीय समीकरणों पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले सांसद सुदीप बंदोपाध्याय के बागी तेवरों ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।
सुदीप बंदोपाध्याय ने अपनाया बगावती रुख, बदले सियासी समीकरण
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुदीप बंदोपाध्याय अब बागी गुट के साथ नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह गुट आगामी सोमवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर सकता है। इस मुलाकात को टीएमसी के भीतर शक्ति संतुलन बदलने के एक बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
केंद्रीय नेताओं से मुलाकात के बाद बढ़ी सियासी गर्मी
सूत्रों के मुताबिक, सुदीप बंदोपाध्याय ने बागी खेमे में शामिल होने के बाद केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। इस दौरान टीएमसी सांसद शताब्दी रॉय भी मौजूद रहीं। इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की खबरें सामने आई हैं। इन मुलाकातों के बाद राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
लोकसभा में ‘असली टीएमसी’ का दावा करने की तैयारी
रिपोर्ट्स के अनुसार, बागी गुट का दावा है कि वे लोकसभा में खुद को ‘असली टीएमसी’ के रूप में पेश करेंगे। सांसद जगदीश चंद्र बसूनिया ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंप दिया है और अब वे औपचारिक रूप से अपने गुट की मान्यता की मांग करेंगे।
उनका कहना है कि संसदीय दल के रूप में अलग पहचान हासिल करने के लिए वे कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखेंगे।
मानस भूनिया के इस्तीफे से और बढ़ी बेचैनी
इस घटनाक्रम के बीच एक और बड़ा राजनीतिक बदलाव सामने आया है। ममता बनर्जी सरकार में मंत्री रहे मानस भूनिया ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इसे टीएमसी के भीतर असंतोष के और गहराने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
टीएमसी सांसद सौगत रॉय भावुक, जताया दुख
पार्टी के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने इस घटनाक्रम पर भावुक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सुदीप बंदोपाध्याय का यह कदम उनके लिए बेहद आहत करने वाला है। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ दिन पहले तक बातचीत में सुदीप ने पार्टी छोड़ने से इनकार किया था, लेकिन अचानक बदले हालात ने उन्हें हैरान कर दिया।
20 सांसदों के बगावती रुख से बढ़ी चिंता
लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद बताए जा रहे हैं, जिनमें से करीब 20 सांसदों के बागी रुख अपनाने की बात सामने आ रही है। अगर यह स्थिति आगे बढ़ती है तो पार्टी के संसदीय ढांचे पर बड़ा असर पड़ सकता है और बंगाल की राजनीति में नई दिशा तय हो सकती है।
बंगाल की सियासत में नया मोड़ तय करती स्थिति
टीएमसी के भीतर चल रहा यह राजनीतिक घटनाक्रम आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति को पूरी तरह बदल सकता है। अब सबकी नजरें लोकसभा स्पीकर के सामने पेश होने वाले दावों और पार्टी के अगले कदम पर टिकी हैं।




















