{"remix_data":[],"remix_entry_point":"challenges","source_tags":["local"],"origin":"unknown","total_draw_time":0,"total_draw_actions":0,"layers_used":0,"brushes_used":0,"photos_added":0,"total_editor_actions":{},"tools_used":{"resize":1},"is_sticker":false,"edited_since_last_sticker_save":true,"containsFTESticker":false}

सूरजपुर: सूरजपुर जिले के चर्चित हत्या प्रकरण में माननीय प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश सूरजपुर ने मुख्य आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं हत्या के बाद साक्ष्य छिपाने में सहयोग करने वाले आरोपी के पिता को भी तीन वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया गया है। न्यायालय का यह फैसला 5 जून 2026 को सुनाया गया।

जानकारी के अनुसार 11 सितंबर 2021 को ग्राम बलदेवनगर निवासी मनोज उरांव ने थाना प्रेमनगर में सूचना दी थी कि बांगों बांध के डुबान क्षेत्र छोटे छुरी में एक व्यक्ति का पैर पानी के ऊपर दिखाई दे रहा है। सूचना पर पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और रस्सी की मदद से शव को बाहर निकाला। शव के गले में रस्सी बंधी हुई थी। पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।जांच के दौरान मृतक की पहचान सुरेन्द्र यादव (22 वर्ष), निवासी हनुमानगढ़, थाना रामानुजनगर के रूप में हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टरों ने मृत्यु का कारण हत्यात्मक बताया, जिसके बाद थाना प्रेमनगर में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।

पुलिस जांच में सामने आया कि मृतक 5 सितंबर 2021 को अपनी बहन और जीजा के घर अंबिकापुर गया था। वहां से वह अपने जीजा सुखसाय उर्फ गंवटिया बरगाह के साथ विध्यांचल गया था। पूछताछ के दौरान आरोपी सुखसाय ने बताया कि विध्यांचल स्थित मकान में मृतक द्वारा उसके पिता के मेडिकल दस्तावेज फाड़ देने की बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया था। विवाद बढ़ने पर आरोपी ने लकड़ी की पराठी से सुरेन्द्र के सिर पर वार किया और बाद में रस्सी से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी।

हत्या के बाद आरोपी ने अपने पिता महावीर बरगाह की मदद से शव को बोरे में भरकर साइकिल में रखा और छोटे छुरी बांध के डुबान क्षेत्र में ले जाकर पत्थर बांधकर शव एवं साइकिल को पानी में फेंक दिया, ताकि घटना के साक्ष्य मिटाए जा सकें।

मामले की विवेचना तत्कालीन विवेचक एसआई निर्मल राजवाड़े ने की। पर्याप्त साक्ष्य जुटाने के बाद न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक रमेश सिंह कुशवाहा ने प्रभावी पैरवी की। सुनवाई के बाद न्यायालय ने आरोपी सुखसाय उर्फ गंवटिया को हत्या के अपराध में आजीवन कारावास तथा साक्ष्य मिटाने के अपराध में 3 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। वहीं महावीर बरगाह को साक्ष्य छिपाने के अपराध में 3 वर्ष के सश्रम कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया गया।

Leave a reply

Please enter your name here
Please enter your comment!