विशेष राजस्व सर्वे, मालिकाना हक और अधूरे प्रधानमंत्री आवास पूर्ण कराने की उठाई मांग

बलरामपुर।बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर विकासखंड के ग्राम पंचायत महेवा के वार्ड क्रमांक 01 और वार्ड क्रमांक 02 बसोलपारा और बाजारपार के लगभग 90 वर्षों से शासकीय भूमि में निवासरत ग्रामीणों ने भारी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंच कलेक्टर बलरामपुर-रामानुजगंज को ज्ञापन सौंपकर शासकीय भूमि पर अपने लंबे समय से चले आ रहे कब्जे एवं निवास के आधार पर पट्टा प्रदान करने की मांग की है। ग्रामीणों ने भूमि संबंधी विवाद, अधूरे प्रधानमंत्री आवास, कथित अवैध वसूली और सामाजिक-आर्थिक परेशानियों को लेकर प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील की है।

ज्ञापन के अनुसार ग्राम पंचायत महेवा के खसरा क्रमांक-2, रकबा 11.92 हेक्टेयर शासकीय भूमि पर लगभग 90 परिवार पिछले चार पीढ़ियों से निवासरत हैं। ग्रामीणों का दावा है कि उनके पूर्वजों को तत्कालीन व्यवस्था के तहत उक्त भूमि पर रहने और खेती-किसानी करने की अनुमति दी गई थी। समय के साथ उन्होंने झाड़ियों और बंजर भूमि को साफ कर उसे रहने एवं कृषि योग्य बनाया।ग्रामीणों ने बताया कि दस्तावेजों के अभाव में नई पीढ़ी को जाति, निवास और अन्य प्रमाण पत्र बनवाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे बच्चों की शिक्षा और विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ लेने में भी बाधा आ रही है।

ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि चुनाव के समय पट्टा दिलाने का आश्वासन देकर कुछ लोगों से राशि ली गई, लेकिन आज तक उन्हें भूमि का अधिकार नहीं मिल सका। ग्रामीणों ने मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।इसके साथ ही कई हितग्राहियों के प्रधानमंत्री आवास अधूरे पड़े होने का मुद्दा भी उठाया गया है। आवेदन में कहा गया है कि कुछ परिवारों को आवास स्वीकृत होने के बावजूद राशि की कमी अथवा प्रशासनिक कारणों से निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से विशेष राजस्व टीम गठित कर मौके पर सर्वे कराने, पात्र परिवारों को काबिज-काश्त के आधार पर पट्टा प्रदान करने, कथित अवैध वसूली की जांच कराने तथा अधूरे प्रधानमंत्री आवासों को शीघ्र पूर्ण कराने की मांग की है।ज्ञापन के साथ प्रभावित परिवारों की सूची भी संलग्न की गई है, जिसमें कई परिवारों को काबिज-काश्तकार तथा कुछ को प्रधानमंत्री आवास के हितग्राही के रूप में दर्शाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निष्पक्ष सर्वे कराया जाए तो दशकों पुरानी भूमि समस्या का स्थायी समाधान संभव है।

कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है ग्रामीण पट्टे की मांग को लेकर पहुंचे थे।एसडीएम को जांच करने निर्देशित किया गया है।जांच उपरांत उचित कार्रवाई की जाएगी।

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