बिलासपुर। NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन का मामला अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। प्रदर्शन के दौरान हुए घटनाक्रम को लेकर पुलिस ने कांग्रेस और NSUI के कई नेताओं व कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इस कार्रवाई के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

देवेंद्र यादव, विनोद जाखड़ और नीरज पांडेय सहित कई नाम शामिल

सिविल लाइन थाना पुलिस द्वारा दर्ज मामले में भिलाई विधायक देवेंद्र यादव, NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़, प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय, जिला शहर अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा समेत कई अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं को आरोपी बनाया गया है। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हुईं, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था और यातायात प्रभावित हुआ।

केंद्रीय मंत्री के निवास घेराव से शुरू हुआ विवाद

जानकारी के अनुसार 3 जून को कांग्रेस और NSUI कार्यकर्ता केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू के निवास का घेराव करने के लिए निकले थे। प्रशासन ने उन्हें निर्धारित सीमा से आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ गए, जहां बड़ी संख्या में लोगों के जुटने से स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

यातायात बाधित होने और अवरोध पैदा करने का आरोप

पुलिस के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान मार्ग अवरुद्ध हुआ और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बनी। इसी आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और संबंधित तथ्यों को खंगालने में जुटी है।

NEET मुद्दे से शुरू हुआ आंदोलन अब राजनीतिक बहस का केंद्र

NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के विरोध में आयोजित इस प्रदर्शन में छात्र संगठन और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बड़ी भागीदारी रही थी। एफआईआर दर्ज होने के बाद यह मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है।

विपक्ष ने उठाए सवाल, सरकार पर लगाए आरोप

कांग्रेस और विपक्षी दलों का आरोप है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने वालों पर कार्रवाई कर उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। वहीं प्रशासन और पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और उसी के तहत कार्रवाई की गई है।

जांच और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर टिकी निगाहें

एफआईआर दर्ज होने के बाद अब प्रदेश की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर हलचल बढ़ गई है। आने वाले दिनों में नेताओं की प्रतिक्रिया, पुलिस जांच और संभावित कानूनी कार्रवाई इस मामले को और चर्चा में ला सकती है। फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों और आम लोगों की नजर बनी हुई है।

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