दुर्ग : बड़े अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड गिरोह का पर्दाफाश करते हुए राजस्थान के 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने बेहद शातिर तरीके से कंपनी डायरेक्टर की फोटो का इस्तेमाल कर अकाउंटेंट को झांसे में लिया और 20 लाख रुपये की ठगी को अंजाम दिया।

WhatsApp डीपी से रची गई ठगी की साजिश

पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने भिलाई के सुंदर नगर निवासी यश बत्रा की कंपनी ‘साईराम व्हील्स प्राइवेट लिमिटेड’ के डायरेक्टर श्रीचंद बत्रा की फोटो को WhatsApp डीपी पर लगाया। इसके बाद कंपनी के अकाउंटेंट से संपर्क कर खुद को कंपनी संचालक बताकर खाते से 20 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए।

शुरुआत में अकाउंटेंट को शक नहीं हुआ, क्योंकि प्रोफाइल फोटो कंपनी डायरेक्टर की थी। इसी भरोसे का फायदा उठाकर साइबर ठगों ने बड़ी रकम अपने खातों में ट्रांसफर करा ली।

रायपुर में छिपकर चला रहे थे साइबर नेटवर्क

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की। सत्यप्रकाश तिवारी ने बताया कि आरोपी रायपुर के अलग-अलग होटलों और गुप्त ठिकानों में छिपकर ठगी का नेटवर्क चला रहे थे।

जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह राजस्थान के लोगों के आधार कार्ड में स्थानीय पता अपडेट कराकर रायपुर में फर्जी बैंक खाते खुलवाता था। इसके बाद ठगी की रकम इन्हीं खातों में ट्रांसफर कर कमीशन के आधार पर बांटी जाती थी।

जयस्तंभ चौक और बूढ़ा तालाब के पास दबोचे गए आरोपी

पुलिस ने घेराबंदी कर मुख्य आरोपी पंकज शर्मा समेत सभी 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की पहचान:

  • पंकज शर्मा
  • मुरली जनागल
  • गोपाल सोनी
  • मोती सिंह
  • मोतीलाल शर्मा
  • बनवारी शर्मा

के रूप में हुई है।

पुलिस ने इन्हें रायपुर के जयस्तंभ चौक और बूढ़ा तालाब इलाके के पास से पकड़ा, जहां वे किराए का मकान तलाश रहे थे ताकि पुलिस से बच सकें।

फर्जी दस्तावेज और कैश बरामद

आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने:

  • 1 लाख 20 हजार रुपये नकद
  • 6 मोबाइल फोन
  • 10 डेबिट कार्ड
  • 4 पैन कार्ड
  • आधार कार्ड
  • ड्राइविंग लाइसेंस
  • चेक बुक
  • पासबुक
  • कई फर्जी दस्तावेज

बरामद किए हैं।

साइबर ठगी के नए तरीके से बढ़ी चिंता

इस मामले ने एक बार फिर दिखाया है कि साइबर अपराधी अब सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल कर बेहद चालाकी से लोगों को निशाना बना रहे हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी बड़े ऑनलाइन ट्रांजैक्शन से पहले फोन पर पहचान की पुष्टि जरूर करें और केवल WhatsApp डीपी देखकर भरोसा न करें।

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