बलरामपुर(अभिषेक सोनी)। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच अब व्यक्तिगत छवि और सम्मान पर हमले के मामले भी तेजी से सामने आने लगे हैं। बलरामपुर जिले के राजपुर थाना क्षेत्र में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां एक पत्रकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर कथित रूप से अपमानजनक वीडियो वायरल किए जाने की शिकायत पुलिस अधीक्षक बलरामपुर के नाम थाना प्रभारी राजपुर को ज्ञापन सौंपकर की है।

शिकायतकर्ता पत्रकार का आरोप है कि वर्ष 2022 में एक त्यौहार के दौरान उनकी नशे की अवस्था का वीडियो बिना अनुमति के बनाया गया था। अब उसी पुराने वीडियो को राजपुर निवासी दो वरिष्ठ पत्रकारों के द्वारा फेसबुक पर अपलोड कर सार्वजनिक रूप से वायरल कर दिया। शिकायतकर्ता का कहना है कि वीडियो वायरल करने का उद्देश्य उनकी सामाजिक छवि खराब करना और मानसिक रूप से प्रताड़ित करना था।

पत्रकार ने अपनी शिकायत में यह भी उल्लेख किया है कि हाल ही में उनके द्वारा ग्राम पंचायत सचिवों द्वारा कथित “मीडिया मैनेजमेंट” के नाम पर चल रही गतिविधियों को लेकर समाचार प्रकाशित किया गया था। इसके बाद से उनके खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। उनका आरोप है कि उसी क्रम में उक्त वीडियो को योजनाबद्ध तरीके से सोशल मीडिया पर वायरल किया गया ताकि उन्हें सामाजिक रूप से बदनाम किया जा सके।

हालांकि शिकायत की जानकारी लगने के बाद संबंधित व्यक्तियों द्वारा वीडियो फेसबुक से डिलीट कर दिया गया, लेकिन तब तक वीडियो हजारों लोगों तक पहुंच चुका था जिसमें काफी लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए हास्यास्पद कॉमेंट भी किए थे।शिकायतकर्ता का कहना है कि वीडियो देखने के बाद लगातार लोगों के फोन आ रहे हैं और उनका उपहास उड़ाया जा रहा है, जिससे उन्हें मानसिक आघात पहुंचा है और उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान हुआ है।

यह मामला अब कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है:

यह पूरा मामला अब पत्रकारिता और सोशल मीडिया की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। कभी पत्रकारिता को समाज का आईना माना जाता था, लेकिन आज सोशल मीडिया की प्रतिस्पर्धा और वायरल संस्कृति ने उसके स्वरूप को काफी हद तक प्रभावित किया है। लाइक, व्यूज और वायरल होने की होड़ में कई बार संवेदनशीलता और नैतिकता पीछे छूटती नजर आती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पत्रकारिता का झुकाव अब जिम्मेदार संवाद से हटकर सोशल मीडिया ट्रोलिंग और व्यक्तिगत हमलों की ओर बढ़ रहा है?

इस मामले ने एक और महत्वपूर्ण बहस को जन्म दिया है कि क्या किसी वरिष्ठ या प्रभावशाली पत्रकार द्वारा किसी अन्य पत्रकार की निजी और कमजोर स्थिति का वीडियो सार्वजनिक करना उचित माना जा सकता है? पत्रकारिता का मूल उद्देश्य समाज के मुद्दों को सामने लाना और सच को जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत करना है, न कि किसी की व्यक्तिगत परिस्थिति को मनोरंजन या अपमान का माध्यम बनाना। जब पत्रकार ही पत्रकार को बदनाम करने में लग जाएं तो यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।

क्या कहता है आईटी अधिनियम और कानून? सोशल मीडिया उपयोग करते समय रखे सावधानियां

कानूनी दृष्टि से भी इस प्रकार की घटनाएं गंभीर मानी जाती हैं। भारत में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) 2000 तथा भारतीय न्याय संहिता के तहत किसी व्यक्ति का निजी या अपमानजनक वीडियो बिना अनुमति सोशल मीडिया पर प्रसारित करना मानहानि, निजता के उल्लंघन और साइबर उत्पीड़न की श्रेणी में आ सकता है। यदि किसी सामग्री को जानबूझकर किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा धूमिल करने के उद्देश्य से प्रसारित किया जाता है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।

सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के लिए भी यह घटना एक सीख है। किसी का वीडियो या फोटो बिना अनुमति साझा करना, किसी की निजी स्थिति का मजाक बनाना, या वायरल संस्कृति के नाम पर किसी की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना न केवल अनैतिक है बल्कि कानूनी अपराध भी बन सकता है। सोशल मीडिया का उपयोग अभिव्यक्ति और संवाद के लिए होना चाहिए, न कि सार्वजनिक अपमान और डिजिटल ट्रायल के लिए।

फिलहाल शिकायतकर्ता ने पुलिस प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित फेसबुक आईडी संचालकों एवं अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। साथ ही वायरल वीडियो को पूरी तरह हटाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने हेतु आवश्यक कदम उठाने का आग्रह भी किया है। अब देखना होगा कि पुलिस प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या यह प्रकरण सोशल मीडिया पर बढ़ती डिजिटल मानहानि की प्रवृत्ति के खिलाफ कोई सख्त संदेश दे पाएगा।

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