पश्चिम बंगाल : फलता विधानसभा सीट पर री-पोलिंग से पहले बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान ने अचानक चुनावी प्रक्रिया से खुद को अलग करने का ऐलान कर दिया। मतदान से ठीक पहले आए इस फैसले ने बंगाल की सियासत में नई बहस छेड़ दी है।फलता सीट पर दोबारा मतदान से पहले उम्मीदवार के पीछे हटने को TMC के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। बीजेपी ने इसे पार्टी की हार का संकेत बताया है, जबकि खुद TMC के नेताओं ने भी जहांगीर खान पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

‘अगर तुम सिंघम हो, तो मैं पुष्पा हूं’ वाले बयान से बने थे चर्चित

जहांगीर खान उस वक्त सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने चुनावी मंच से फिल्मी अंदाज में बयान दिया था। उन्होंने कहा था, ‘अगर तुम सिंघम हो, तो मैं पुष्पा हूं… पुष्पराज, झुकेगा नहीं।’उनका यह बयान चुनाव आयोग की ओर से तैनात आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को लेकर माना गया था। बयान के बाद उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया।अब जब जहांगीर खान ने चुनावी प्रक्रिया से दूरी बनाई है, तो विपक्ष के साथ-साथ उनकी अपनी पार्टी के नेता भी उन पर तंज कस रहे हैं।

बीजेपी का हमला, ‘अब सारी गुंडागर्दी खत्म’

बीजेपी नेता दिलीप घोष ने जहांगीर खान के फैसले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि TMC को अपनी हार साफ दिखाई देने लगी है, इसलिए पार्टी के नेता प्रचार से गायब हो रहे हैं।दिलीप घोष ने कहा कि अब सारी गुंडागर्दी खत्म हो चुकी है और जनता इस बार खुलकर वोट डालेगी। उन्होंने दावा किया कि फलता सीट पर TMC की स्थिति बेहद कमजोर हो चुकी है।

अपनी ही पार्टी ने उठाए सवाल

जहांगीर खान के फैसले पर TMC के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि अगर कोई खुद को ‘पुष्पा’ बताता है और कहता है कि ‘पुष्पा झुकता नहीं’, तो फिर आखिर वह झुका क्यों?इस बयान के बाद माना जा रहा है कि पार्टी के भीतर भी जहांगीर खान के फैसले को लेकर असहमति और नाराजगी मौजूद है।

सुवेंदु अधिकारी ने भी साधा निशाना

बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने चुनाव प्रचार के दौरान पहले ही जहांगीर खान को निशाने पर लिया था। उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार के समर्थन में रैली करते हुए कहा था कि जो खुद को ‘पुष्पा’ कहता है, अब उसकी राजनीति की जिम्मेदारी उनके ऊपर है।सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि इस बार फलता में लोग बिना किसी डर और दबाव के मतदान करेंगे।

गिरफ्तारी और FIR के बाद बदला राजनीतिक माहौल

फलता सीट का चुनावी माहौल उस समय और गर्म हो गया जब जहांगीर खान के करीबी रिश्तेदार सैदुल खान को गिरफ्तार किया गया। उन पर हिंसा और जानलेवा हमले से जुड़े आरोपों में FIR दर्ज हुई थी।इसके बाद जहांगीर खान पर भी कई मामले दर्ज किए गए। कानूनी दबाव बढ़ने के बाद उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने उन्हें 25 मई तक गिरफ्तारी से राहत जरूर दी, लेकिन जांच में सहयोग करने का निर्देश भी दिया।

फलता में दोबारा मतदान क्यों हो रहा है?

फलता विधानसभा क्षेत्र में दूसरे चरण के मतदान के दौरान EVM गड़बड़ी और चुनावी अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद चुनाव आयोग ने 21 मई को क्षेत्र के सभी 285 मतदान केंद्रों पर री-पोलिंग कराने का आदेश दिया।अब जहांगीर खान के चुनावी प्रक्रिया से पीछे हटने के बाद इस सीट का मुकाबला और ज्यादा दिलचस्प माना जा रहा है।

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