पीएम आवास की रकम दूसरे के खाते में ट्रांसफर! 3 साल से दफ्तरों के चक्कर काट रहा हितग्राही, आखिर जिम्मेदार कौन?

सूरजपुर: सूरजपुर जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर एक बेहद गंभीर लापरवाही सामने आई है। सरकारी सिस्टम की कथित गलती का खामियाजा एक गरीब हितग्राही पिछले कई वर्षों से भुगत रहा है। दरअसल यह मामला ग्राम रामनगर, थाना बिश्रामपुर निवासी 59 वर्षीय रामवृक्ष कुशवाहा का है, जिनके नाम पर वर्ष 2020-21 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत हुआ, लेकिन योजना की राशि उनके खाते में पहुंचने के बजाय किसी दूसरे व्यक्ति के खाते में ट्रांसफर हुई।

मिली जानकारी के अनुसार हितग्राही रामवृक्ष कुशवाहा पिता स्वर्गीय भोला राम कुशवाहा का प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत रजिस्ट्रेशन नंबर CH2475246 तथा सेक्शन नंबर CH05009/4/2343 दिनांक 5 सितंबर 2020 को स्वीकृत हुआ था। शासन की ओर से आवास निर्माण के लिए मिलने वाली राशि हितग्राही के खाते में भेजी जानी थी, लेकिन कथित तौर पर विभागीय लापरवाही या डाटा एंट्री में हुई भारी गलती के कारण राशि ग्राम रामनगर निवासी रामप्रकाश के खाते में जमा होती रही।

आवेदन में बताया गया है कि हितग्राही रामवृक्ष का बैंक खाता सेंट्रल बैंक शाखा सतपता (बिश्रामपुर) में खाता क्रमांक 2194860243 है, जबकि योजना की राशि रामप्रकाश नामक व्यक्ति के सेंट्रल बैंक रामनगर शाखा स्थित खाते क्रमांक 3371524689 में ट्रांसफर होती रही। दस्तावेजों के मुताबिक 19 मई 2023 को भी 25 हजार रुपए की अंतिम राशि दूसरे खाते में अंतरण होने का उल्लेख है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी गलती वर्षों तक कैसे चलती रही? यदि राशि गलत खाते में जा रही थी तो पंचायत, जनपद, बैंक और संबंधित विभागों ने समय रहते इसकी जांच क्यों नहीं की? हितग्राही लगातार कार्यालयों के चक्कर काट रहा है, लेकिन अब तक उसे न्याय नहीं मिल पाया है। गरीब हितग्राही का आरोप है कि कई बार अधिकारियों को जानकारी देने के बावजूद मामले का समाधान नहीं हुआ।

रामवृक्ष कुशवाहा ने जनदर्शन शिविर में कलेक्टर सूरजपुर को आवेदन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और गलत खाते में गई पूरी राशि वापस दिलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकारी योजना का लाभ पाने के लिए उन्हें वर्षों से भटकना पड़ रहा है, जबकि गलती उनकी नहीं बल्कि सिस्टम की है।

यह मामला सिर्फ एक हितग्राही की परेशानी नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। आखिर गरीबों के लिए बनाई गई योजनाओं में यदि इस तरह की लापरवाही होगी तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में तत्काल कार्रवाई करता है या फिर एक गरीब हितग्राही यूं ही दफ्तरों की चौखट घिसता रहेगा।

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