MP News: मध्य प्रदेश के देवास जिले में हुए भीषण पटाखा फैक्ट्री हादसे ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है. इस दर्दनाक हादसे के बाद अब पड़ोसी जिले शाजापुर का प्रशासन भी अपनी कुंभकर्णी नींद से जाग गया है. रविवार की रात अचानक शाजापुर शहर की सड़कों पर उतर एसडीएम मनीषा वास्कले और तहसीलदार गौरव पोरवाल भारी पुलिस बल के साथ अवैध पटाखा व्यापारी के ठिकानों पर दबिश देने पहुंचे.

प्रशासनिक टीम ने रात 8 से 11 बजे के बीच शहर के दो प्रमुख इलाकों में ताबड़तोड़ छापेमारी की. जहां चौक इलाका (अंडा गली) में सैफुद्दीन नामक व्यापारी की दुकान पर छापा मारकर भारी मात्रा में अवैध पटाखे जब्त किए. वहीं नाथवाड़ा इलाका में मोहन योगी के ठिकाने पर दबिश देकर बड़ी तादाद में अवैध पटाखों का जखीरा बरामद किया. प्रशासनिक टीम ने शहर में लगभग 4 दुकानों और गोदामों को सील करने की कार्रवाई की है.

बड़े हादसे का इंतजार क्यों?

कार्रवाई ने प्रशासन की कार्य प्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है. सवाल यह है कि आखिर इस प्रकार की मुस्तैदी किसी बड़े हादसे के बाद ही क्यों दिखाई देती है? देवास में मासूमों की जान जाने से पहले शाजापुर प्रशासन का इस जानलेवा अवैध कारोबार की तरफ ध्यान क्यों नहीं था? क्या प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार था?

‘रिहायशी इलाकों में बारूद का ढेर’

शाजापुर में हुई यह कार्रवाई भले ही तारीफ के काबिल हो, लेकिन जनता यह अच्छी तरह जानती है कि यह सिर्फ एक ‘दिखावटी’ अलर्टनेस है, जो देवास हादसे के डर से पैदा हुई है. अगर यह कार्रवाई रूटीन तौर पर होती, तो आज शहर के बीचों-बीच रिहायशी इलाकों में बारूद के यह ढेर जमा नहीं होते.

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