देश :  तेजी से बढ़ रहे लंबित मामलों के बीच न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने वाले अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। अब सुप्रीम Court में जजों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 कर दी गई है। इसमें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया शामिल नहीं होंगे।

लाखों लंबित मामलों के बीच सरकार का बड़ा फैसला

सरकार का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में लगातार बढ़ते मामलों के कारण सुनवाई में देरी हो रही थी। ऐसे में जजों की संख्या बढ़ाने का फैसला न्याय प्रक्रिया को तेज करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। नए जजों की नियुक्ति के बाद पुराने मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

अब लोगों को जल्दी मिल सकेगा न्याय

न्यायपालिका पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए जारी किए गए ‘सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026’ का मुख्य उद्देश्य अदालत की कार्यक्षमता को मजबूत करना है। माना जा रहा है कि अतिरिक्त जजों की नियुक्ति से सुनवाई की गति बढ़ेगी और आम लोगों को समय पर न्याय मिल सकेगा।

केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने दी जानकारी

केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री Arjun Ram Meghwal ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए इस फैसले की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ने ‘सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) अधिनियम, 1956’ में संशोधन से जुड़े अध्यादेश को मंजूरी दे दी है।

मोदी कैबिनेट पहले ही दे चुकी थी हरी झंडी

इससे पहले प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में सुप्रीम कोर्ट में चार नए जजों के पद बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। 5 मई को हुई बैठक में ‘सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026’ को संसद में पेश करने का फैसला लिया गया था।

2019 के बाद पहली बार फिर बढ़ी संख्या

सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने को लेकर पहला कानून वर्ष 1956 में बनाया गया था। इसके बाद जरूरत के हिसाब से समय-समय पर बदलाव किए जाते रहे हैं। इससे पहले वर्ष 2019 में जजों की संख्या 30 से बढ़ाकर 33 की गई थी। अब नए अध्यादेश के बाद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सहित सुप्रीम कोर्ट में कुल स्वीकृत जजों की संख्या 38 हो जाएगी।

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