पुलिस ने कहा - पूरी कार्रवाई ही थी अवैध, 200 पन्नों की चार्जशीट में कई चौंकाने वाले खुलासे

सीबीआई जांच की मांग तेज, आदिवासी संगठन ने एसपी को सौंपा आवेदन

अम्बिकेश गुप्ता

कुसमी। बलरामपुर जिले के बहुचर्चित हंसपुर रामनरेश हत्याकांड मामले में पुलिस ने बड़ा कदम उठाते हुए तत्कालीन कुसमी एसडीएम करुण डहरिया समेत चार आरोपियों के खिलाफ रामानुजगंज न्यायालय में विस्तृत चालान पेश कर दिया है। करीब 200 से अधिक पन्नों की इस चार्जशीट में पुलिस ने कई गंभीर तथ्यों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल और तकनीकी साक्ष्यों को शामिल किया है।

पुलिस ने अपनी विवेचना में स्पष्ट कहा है कि जिस कथित अवैध खनिज कार्रवाई के नाम पर पूरी घटना हुई, वह स्वयं विधि सम्मत नहीं थी। पुलिस के अनुसार कार्रवाई न केवल नियम विरुद्ध थी, बल्कि संबंधित अधिकारियों ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर बिना वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए पूरी कार्रवाई की थी। मामले में तत्कालीन एसडीएम करुण डहरिया सहित अन्य आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस ने न्यायालय को यह भी अवगत कराया है कि कुछ तकनीकी रिपोर्ट और दस्तावेज अभी प्राप्त होना बाकी हैं, जिनके मिलने के बाद पूरक चालान भी पेश किया जाएगा।

15 फरवरी की रात क्या हुआ था...!

पुलिस जांच के अनुसार यह पूरा घटनाक्रम 15 फरवरी 2026 की रात का है। तत्कालीन एसडीएम करुण डहरिया अपने सहयोगियों के साथ अवैध खनिज परिवहन की सूचना पर झारखंड सीमा क्षेत्र लुचुतघाट पहुंचे थे। चार्जशीट में उल्लेख है कि वहां बिना स्थानीय प्रशासन को सूचना दिए और बिना सक्षम वैधानिक प्रक्रिया अपनाए एक ट्रक को रोककर जब्त किया गया। पुलिस के अनुसार ट्रक चालक और खलासी को जबरन वाहन से नीचे उतारा गया तथा ट्रक को निजी व्यक्तियों की मदद से घटनास्थल से हटाकर हंसपुर की ओर ले जाया गया।

इसी दौरान चालक और खलासी ने ट्रक मालिक राहुल जायसवाल को सूचना दी कि कुछ लोग ट्रक को जबरन ले जा रहे हैं। सूचना मिलते ही ग्रामीण सक्रिय हुए और हंसपुर नदी के पास ट्रक को रोक लिया। इसके बाद विवाद बढ़ गया। पुलिस के अनुसार कुछ देर बाद तत्कालीन एसडीएम अतिरिक्त लोगों के साथ वहां पहुंचे, जिनमें सुदीप यादव, मंजीत यादव और अजय प्रताप सिंह शामिल थे।

“बिना चेतावनी ग्रामीणों पर हमला” – पुलिस का दावा...!

पुलिस द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत चालान के अनुसार आरोपियों ने ग्रामीणों के साथ जातिसूचक गालियां देते हुए मारपीट शुरू कर दी। घटना में आकाश अगरिया, अजीत राम, राकेश खलखो, राजेंद्र और रुपसाय सहित कई ग्रामीण घायल हुए, जबकि रामनरेश की मौत हो गई। चार्जशीट में कहा गया है कि घटना के दौरान क्षेत्र में भारी अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। कई ग्रामीण जान बचाकर भागे। घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया और बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतर आए थे।

एसडीएम के पास कार्रवाई का अधिकार ही नहीं था...!

पुलिस की विवेचना में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह बताया गया है कि तत्कालीन एसडीएम द्वारा की गई कथित खनिज कार्रवाई कानूनी रूप से वैध नहीं थी। पुलिस के अनुसार करुण डहरिया अपने क्षेत्राधिकार से बाहर झारखंड राज्य में पहुंचे थे। वहां उन्होंने न तो स्थानीय प्रशासन को सूचना दी और न ही पर्याप्त पुलिस बल या सुरक्षा व्यवस्था साथ रखी। चार्जशीट में माइंस एंड मिनरल (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट 1957 की धारा 23-बी तथा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 100 के उल्लंघन का उल्लेख किया गया है। जांच में यह भी कहा गया है कि जिस कार्रवाई के नाम पर पूरी घटना हुई, उसकी वैधानिक अधिकारिता स्पष्ट नहीं थी।

“पैसे की मांग” का भी उल्लेख...!

पुलिस ने चार्जशीट में एक और गंभीर आरोप का उल्लेख किया है। जांच के अनुसार कार्रवाई से पहले एक व्यक्ति के मोबाइल फोन से ट्रक मालिक राहुल जायसवाल को कॉल कर पैसों की मांग की जा रही थी। संबंधित व्यक्ति को पुलिस ने गवाह बनाया है। पुलिस के मुताबिक राहुल जायसवाल ने अपने बयान में कहा है कि उनसे पहले भी पैसों की मांग की जाती रही थी। विवेचना में कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को शामिल किया गया है।

डिजिटल साक्ष्यों से आरोपियों की मौजूदगी प्रमाणित...!

जांच एजेंसी ने मोबाइल लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड और घटनास्थल से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को मामले का महत्वपूर्ण आधार बताया है। पुलिस का दावा है कि तकनीकी साक्ष्य यह स्पष्ट करते हैं कि सभी आरोपी घटना के समय मौके पर मौजूद थे और विवाद में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।

32 गवाहों के बयान, कई अहम नाम शामिल...!

पुलिस ने मामले में 32 गवाहों को सूचीबद्ध किया है। इनमें आकाश अगरिया का कलमबंद बयान विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अलावा अजीत राम, अमलेश राम, राकेश खलखो और रुपसाय के बयान भी अभियोजन पक्ष के लिए अहम बताए जा रहे हैं। पुलिस का मानना है कि प्रत्यक्षदर्शी गवाहों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर मामला मजबूत स्थिति में है।

पुलिस की कार्रवाई की हो रही सराहना...!

क्षेत्र में कई सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों ने निष्पक्ष विवेचना कर चालान प्रस्तुत करने पर पुलिस प्रशासन की सराहना की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रभावशाली अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर पुलिस ने निष्पक्ष जांच का संदेश दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं होती तो मामले के कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने नहीं आ पाते।

चालान पेश होने से तीन दिन पहले उठी सीबीआई जांच की मांग...!

इसी बीच चालान न्यायालय में पेश किए जाने से तीन दिन पूर्व आदिवासी समाज संगठन “राजी पड़हा भारत” द्वारा पुलिस अधीक्षक बलरामपुर को आवेदन सौंपकर मामले की सीबीआई जांच की मांग भी की गई। संगठन ने अपने आवेदन में कहा है कि हंसपुर निवासी रामनरेश की मौत और ग्रामीणों के साथ हुई मारपीट की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच के लिए स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया कि आदिवासी समाज घटना को लेकर आक्रोशित है और न्याय की मांग कर रहा है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो उरांव आदिवासी समाज आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और न्यायालयीन लड़ाई के लिए बाध्य होगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। आवेदन की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, कलेक्टर और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग सहित कई संवैधानिक पदों को भी भेजी गई है।

घटना के बाद मचा था राजनीतिक और प्रशासनिक हड़कंप...!

हंसपुर कांड सामने आने के बाद पूरे प्रदेश में आदिवासी क्षेत्रों में प्रशासनिक कार्रवाई और सत्ता के दुरुपयोग को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई थी। कई आदिवासी संगठनों ने इसे प्रशासनिक अत्याचार बताया था। घटना के विरोध में कई स्थानों पर प्रदर्शन हुए थे तथा निष्पक्ष जांच की मांग उठी थी। विपक्षी दलों ने भी सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

अब न्यायालयीन प्रक्रिया पर नजर...!

रामानुजगंज न्यायालय में चालान पेश होने के बाद अब मामले की नियमित सुनवाई शुरू होने की संभावना है। कानूनी जानकारों का मानना है कि पुलिस द्वारा प्रस्तुत चार्जशीट में जिन तथ्यों का उल्लेख किया गया है, वे मामले को और गंभीर बना सकते हैं। वहीं पुलिस ने संकेत दिए हैं कि फॉरेंसिक और अन्य तकनीकी रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद पूरक चालान भी प्रस्तुत किया जाएगा। ऐसे में आने वाले समय में इस बहुचर्चित हत्याकांड से जुड़े और भी बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।

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