

रायपुर। राजधानी में वर्षों से चर्चा में बना स्काईवॉक प्रोजेक्ट एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। 21 मई 2025 को दोबारा शुरू हुआ निर्माण कार्य 20 अप्रैल 2026 तक पूरा होना था, लेकिन तय समय निकल जाने के बाद भी यह अधूरा पड़ा है। लंबे इंतजार के बावजूद लोगों को अब तक इस परियोजना का लाभ नहीं मिल सका है।
लिफ्ट-एस्केलेटर गायब, 100 सीढ़ियां चढ़ना बनेगा चुनौती
मौजूदा स्थिति यह है कि निर्माण एजेंसी फिलहाल केवल सीढ़ियों के निर्माण में जुटी हुई है। लिफ्ट और एस्केलेटर जैसी सुविधाएं अब तक जमीन पर नहीं उतरी हैं। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति स्काईवॉक का उपयोग करना चाहता है, तो उसे करीब 100 सीढ़ियां चढ़नी और उतरनी पड़ेंगी, जो बुजुर्गों, मरीजों और आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है।
बढ़ती लागत और बदलता लेआउट, प्रोजेक्ट हुआ महंगा
यह स्काईवॉक परियोजना शहर में बढ़ते ट्रैफिक और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 2016-17 में शुरू की गई थी। शुरुआत में 1470 मीटर लंबे इस प्रोजेक्ट की लागत 42.55 करोड़ तय की गई थी और इसे 8 महीने में पूरा करना था। लेकिन लगातार डिजाइन में बदलाव के कारण लागत बढ़कर करीब 77 करोड़ तक पहुंच गई।
करीब 60 प्रतिशत काम पूरा होने के बावजूद पहले ही चरण में 34 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके थे।
सरकार बदली तो जांच शुरू, रिपोर्ट अब तक नहीं आई
2018 में सरकार बदलने के बाद इस प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पर सवाल उठे और जांच समिति का गठन किया गया। हालांकि, आज तक उस जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हो सकी है, जिससे पारदर्शिता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
नए टेंडर के बाद भी सुस्ती, 10 महीने में नहीं पूरा हुआ काम
अधूरे ढांचे को पूरा करने के लिए करीब एक साल पहले लोक निर्माण विभाग ने 37.75 करोड़ रुपये का नया टेंडर जारी किया था। वर्तमान में PSA कंस्ट्रक्शन इस पर काम कर रही है, लेकिन 10 महीने बीतने के बाद भी प्रोजेक्ट अधूरा है।
कांग्रेस का हमला, उपयोगिता पर उठाए सवाल
इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने भी सरकार को घेरा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह प्रोजेक्ट अब ‘सफेद हाथी’ बन चुका है, जिस पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं, लेकिन आम जनता को इसका कोई खास लाभ नहीं मिल रहा।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्काईवॉक का डिजाइन व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि कई जगह सीढ़ियां चढ़ने के बाद भी गंतव्य तक सीधा पहुंचना संभव नहीं है।
जनता को इंतजार, कब मिलेगा स्काईवॉक का फायदा
लंबे समय से अधूरे इस प्रोजेक्ट को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक रायपुरवासियों को इसका लाभ मिलेगा। लगातार बढ़ती लागत और देरी ने इस परियोजना की उपयोगिता और योजना दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।





















