

मुंबई : फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। 60 के दशक के चर्चित अभिनेता सुदेश कुमार का 1 मई को 95 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके जाने से हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर की एक और मजबूत कड़ी टूट गई है।
आखिरी वक्त में बिगड़ी तबीयत: घर पर ली अंतिम सांस
मिली जानकारी के अनुसार, सुदेश कुमार को सांस लेने में तकलीफ होने लगी थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में उनकी इच्छा के अनुसार उन्हें घर लाया गया, जहां आवश्यक मेडिकल व्यवस्था की गई थी। उनकी पत्नी जया धवन ने बताया कि अगली सुबह उन्होंने शांतिपूर्वक अंतिम सांस ली।
पेशावर से मुंबई तक का सफर: सपनों को दिया नया मुकाम
1931 में पेशावर में जन्मे सुदेश कुमार का बचपन में ही परिवार मुंबई आ गया था। यहीं उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और आगे का रास्ता तय किया। उन्होंने एल्फिंस्टन कॉलेज से साइंस में ग्रेजुएशन किया था।उनके पिता चाहते थे कि वे डॉक्टर बनें, लेकिन उनका मन अभिनय में रमा हुआ था और यही जुनून उन्हें फिल्मी दुनिया तक ले आया।
कपूर परिवार से जुड़ाव: थिएटर से फिल्मों तक की शुरुआत
सुदेश कुमार का कपूर परिवार से दूर का रिश्ता था, जिसकी वजह से उन्हें इंडस्ट्री में शुरुआती मौका मिला। उन्होंने पृथ्वीराज कपूर के थिएटर ग्रुप से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की।शुरुआत में छोटे रोल मिले, लेकिन अपनी सशक्त अभिनय क्षमता से उन्होंने धीरे धीरे दर्शकों का ध्यान खींच लिया।
इन फिल्मों ने दिलाई पहचान: ‘छोटी बहन’ से बने स्टार
सुदेश कुमार को असली पहचान फिल्म छोटी बहन से मिली, जिसने उन्हें घर घर में लोकप्रिय बना दिया। इसके बाद ‘भरोसा’, ‘गृहस्थी’ और ‘खानदान’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को खूब सराहा गया।उनकी फिल्म सारंगा उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई, जिसके बाद वे रातोंरात स्टार बन गए।
एक युग का अंत: इंडस्ट्री में शोक की लहर
सुदेश कुमार के निधन की खबर सामने आते ही फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने अपने अभिनय से उस दौर की फिल्मों को जो पहचान दी, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।

































