देश-विदेश : अपने प्रवचनों से लाखों लोगों को प्रेरित करने वाले Premanand Maharaj के दरबार में एक बार फिर ऐसा सवाल उठा, जो आज के व्यस्त जीवन से जुड़ा है। एक भक्त ने पूछा कि जब परिवार, जिम्मेदारियां और काम इतना ज्यादा हो, तो आखिर नामजप कैसे संभव है?इस सवाल का जवाब इतना सटीक और सरल था कि सुनने वाले खुद अपनी दिनचर्या पर सोचने को मजबूर हो गए।

‘राधा-राधा’ कहने में आखिर दिक्कत क्या है?

महाराज ने मुस्कुराते हुए कहा कि भगवान का नाम लेने में आखिर मुश्किल क्या है? उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि असल समस्या समय की नहीं, बल्कि हमारी सोच और आदतों की है। जब भजन की बात आती है, तो लोग तुरंत कहते हैं कि हमारे पास समय नहीं है, लेकिन वही लोग घंटों मोबाइल पर व्यस्त रहते हैं।उनके अनुसार, यही हमारी सबसे बड़ी ईमानदारी की कमी है।

24 घंटे का गणित: समय है, बस उपयोग की जरूरत

महाराज ने दिन के 24 घंटों का सरल हिसाब समझाते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति 10-12 घंटे भी काम करता है, 6 घंटे सोता है, 2 घंटे खाने-पीने और अन्य कार्यों में लगाता है, और थोड़ा समय मनोरंजन में भी देता है, तब भी उसके पास कुछ समय बचता है।उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति सिर्फ 2-3 घंटे भी सच्चे मन से भजन कर ले, तो वह ईश्वर की कृपा पाने के लिए पर्याप्त है।

‘जिसने किया, उसी ने पाया’: भक्ति में बहाने नहीं चलते

Premanand Maharaj ने यह भी स्पष्ट किया कि भक्ति में सफलता उन्हीं को मिलती है, जो वास्तव में प्रयास करते हैं। जो लोग गृहस्थ जीवन का बहाना बनाकर नामजप से दूर भागते हैं, वे खुद को ही धोखा देते हैं।उन्होंने इसे दवा और रोग के उदाहरण से समझाया कि जैसे बीमारी बिना दवा के ठीक नहीं होती, वैसे ही जीवन की परेशानियां बिना ईश्वर के नाम के दूर नहीं हो सकतीं।

आधुनिक जीवन के लिए बड़ा संदेश

यह संदेश केवल धार्मिक नहीं, बल्कि जीवनशैली से जुड़ा भी है। आज के समय में जहां हर कोई व्यस्तता का हवाला देता है, वहां यह सीख जरूरी है कि असली समस्या समय की नहीं, बल्कि प्राथमिकताओं की है।अगर मन में इच्छा और नीयत साफ हो, तो कुछ मिनटों का नामजप भी जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

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