

Madhya Pradesh: रायसेन जिले के सुल्तानगंज इलाके से सामने आई घटना ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की हालत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोमवार रात एक युवक की मौत के बाद गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने हाईवे पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया, जिससे इलाके में देर रात तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
घरेलू विवाद के बाद उठाया खौफनाक कदम
जानकारी के अनुसार, देगुवा गांव निवासी आदित्य शिल्पकार का घर में किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। तनाव के बीच उसने पास के आम के पेड़ पर फांसी लगाने की कोशिश की। परिजनों ने समय रहते उसे नीचे उतार लिया और गंभीर हालत में तुरंत सुल्तानगंज के शासकीय अस्पताल पहुंचाया।
अस्पताल में डॉक्टर नहीं, एंबुलेंस भी नहीं मिली
परिजनों का आरोप है कि जब वे युवक को अस्पताल लेकर पहुंचे, तब वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। केवल एक स्टाफ नर्स और एक दाई ही मौजूद थीं। स्थिति गंभीर होने के बावजूद न तो प्राथमिक उपचार मिला और न ही उसे बड़े अस्पताल रेफर करने के लिए 108 एंबुलेंस समय पर उपलब्ध हो सकी।
परिजनों का कहना है कि यदि समय पर इलाज और एंबुलेंस मिल जाती, तो युवक की जान बचाई जा सकती थी।
मौत के बाद फूटा गुस्सा, सड़क पर उतरे ग्रामीण
युवक की मौत की खबर मिलते ही परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो गए। उन्होंने सुल्तानगंज बस स्टैंड चौराहे पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया। इस विरोध के चलते हाईवे पर लंबा जाम लग गया और दोनों ओर वाहनों की कतारें लग गईं, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।
अधिकारियों के आश्वासन पर खत्म हुआ प्रदर्शन
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिजनों और ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें समझाया और मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया। इसके बाद प्रदर्शन खत्म किया गया और जाम को खुलवाया गया।
व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
यह घटना एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की वास्तविक स्थिति को उजागर करती है। डॉक्टरों की अनुपस्थिति, एंबुलेंस की कमी और आपातकालीन सेवाओं में लापरवाही जैसे मुद्दे सीधे तौर पर लोगों की जान पर भारी पड़ रहे हैं।

































