

मध्य प्रदेश : उज्जैन जिले में एक सगाई समारोह चर्चा का बड़ा विषय बन गया है, जहां दूल्हे के पिता ने दहेज जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ मजबूत संदेश देकर सभी का दिल जीत लिया। यह मामला बड़नगर तहसील के बंगरेड गांव का है।
सगाई में आया लाखों का दहेज, लेकिन पिता ने किया साफ इनकार
26 अप्रैल को जितेंद्र सिंह राजावत के बेटे आदर्शदीप सिंह की सगाई बिंदिया कुमारी के साथ बड़े ही धूमधाम से आयोजित की गई थी। समारोह में सैकड़ों मेहमान शामिल हुए और माहौल पूरी तरह उत्सव जैसा था।
लेकिन सगाई के दौरान वधू पक्ष की ओर से 15 तोला सोना और 25 लाख रुपये दहेज के रूप में दिए गए, जिसे दूल्हे के पिता ने स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया।
सिर्फ अंगूठी स्वीकार की, बाकी दहेज लौटाया
जितेंद्र सिंह राजावत ने परंपरा के अनुसार केवल सगाई की अंगूठी स्वीकार की और बाकी पूरा सोना और नकद राशि वापस लौटा दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्हें बहू के रूप में लक्ष्मी चाहिए, लेकिन दहेज नहीं।
दहेज मुक्त समाज का दिया बड़ा संदेश
इस मौके पर उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य समाज को यह संदेश देना है कि शादी को दहेज से नहीं बल्कि रिश्तों और सम्मान से जोड़ना चाहिए। वे लंबे समय से दहेज मुक्त समाज के लिए जागरूकता अभियान चला रहे हैं।
समाजसेवा से जुड़े हैं दूल्हे के पिता
जितेंद्र सिंह राजावत क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष भी हैं और लंबे समय से सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं। वे पर्यावरण संरक्षण, गरीब बच्चों की शिक्षा और जरूरतमंद लड़कियों की शादी में भी सहयोग करते रहे हैं।
सामाजिक कुरीति पर करारा प्रहार, लोग कर रहे तारीफ
दहेज लौटाने के इस कदम की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। लोग इसे एक प्रेरणादायक उदाहरण मान रहे हैं, जो समाज में बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश देता है।
एक सगाई, लेकिन बड़ा सामाजिक संदेश
यह घटना सिर्फ एक पारिवारिक समारोह नहीं रही, बल्कि दहेज जैसी कुप्रथा के खिलाफ एक मजबूत सामाजिक संदेश बन गई है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा साबित हो सकती है।

































