CG News: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. जस्टिस एके प्रसाद ने मामले की सुनवाई करते हुए हुए कहा कि अनुकंपा नियुक्ति कोई तोहफा या विरासत में मिलने वाली संपत्ति नहीं है. ये पूरे परिवार को आर्थिक संकट से निकालने वाली एक सहायता है.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, अंबिकापुर में रहने वाली ज्ञांती तिवारी के पति की मृत्यु साल 2001 में हो गई. वे पुलिस विभाग में कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात थे. पति की मौत के बाद नौकरी बेटे अविनाश को मिल गई. इसी बीच अविनाश की शादी नेहा तिवारी से हो गई. खुशियां ज्यादा देर टिक पायी, इससे पहले ही दिसंबर 2021 में अविनाश की भी मौत हो गई. अविनाश की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति बहू नेहा को मिल गई. नौकरी मिलने के बाद बहू का व्यवहार बदल गया. सास के साथ दुर्व्यवहार करने लगा.

सास ने नियुक्ति निरस्त करने की मांग की

बहू के व्यवहार से दुखी होकर सास ने हाई कोर्ट में अपील की. अदालत में सास ने कहा कि राज्य सरकार ने बेटे की मौत के बाद बहू को इस शर्त पर नौकरी दी गई कि देखभाल और भरण पोषण करेगी. ज्ञांती तिवारी ने याचिका में कहा कि बहू उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करती है. नेहा तिवारी को 8 मार्च 2022 को जारी किया गया अनुकंपा नियुक्ति आदेश निरस्त किया जाए.

कोर्ट ने कहा – सास का ख्याल रखना होगा

मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की. कहा कि बहू को आश्रित सास का भरण पोषण करना होगा. ऐसा नहीं किया तो नियुक्ति को रद्द कर दिया जाएगा. इसके साथ ही कहा कि बहू को बेटे के स्थान पर नौकरी मिली है तो ये कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है कि वह सास की देखभाल करे.

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