मध्य प्रदेश : मऊगंज जिले के हनुमना जनपद अंतर्गत गनिगवा गांव में बन रही करोड़ों रुपये की सड़क अब गंभीर आरोपों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य में भारी गड़बड़ियां हो रही हैं और मानकों की खुली अनदेखी की जा रही है। हालात ऐसे बन गए हैं कि सड़क बनने से पहले ही इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।

सूचना बोर्ड गायब, पारदर्शिता पर बड़ा सवाल
निर्माण स्थल पर न तो कोई सूचना बोर्ड लगाया गया है और न ही परियोजना से जुड़ी अहम जानकारी उपलब्ध कराई गई है। न निर्माण एजेंसी का नाम, न स्वीकृत बजट और न ही सड़क की लंबाई या चौड़ाई का कोई विवरण मौजूद है। इससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं और ग्रामीण इसे जानकारी छिपाने की कोशिश मान रहे हैं।

अधिकारियों और ठेकेदार पर मिलीभगत का आरोप
ग्रामीणों ने सीधे तौर पर राजेश श्रीवास्तव और अर्जुन सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि दोनों की मिलीभगत से घटिया निर्माण किया जा रहा है और सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है।

मानकों की अनदेखी, गुणवत्ता से समझौता
निर्धारित तकनीकी प्रक्रिया के अनुसार पहले मजबूत बेस तैयार किया जाना था, जिसमें मिट्टी, मुरम, पानी का छिड़काव और रोलर से दबाव जरूरी होता है। लेकिन मौके पर न तो पानी डाला जा रहा है, न ही रोलर का इस्तेमाल किया जा रहा है। आवश्यक सामग्री के बजाय मिट्टी मिश्रित गिट्टी का उपयोग कर सड़क तैयार की जा रही है।

सच्चाई छिपाने का आरोप, पहले बना दिए गए साइड शोल्डर
सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि सड़क की वास्तविक मोटाई छिपाने के लिए पहले ही किनारों पर शोल्डर बना दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि सड़क की बेस मोटाई केवल 1.5 इंच रखी जा रही है, जो तय मानकों से काफी कम है।

शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं, बढ़ा अविश्वास
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार शिकायत की, लेकिन अब तक कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर जांच के लिए नहीं पहुंचा। इससे लोगों में यह आशंका गहराती जा रही है कि कहीं न कहीं इस पूरे मामले को संरक्षण मिल रहा है।

कुछ महीनों में उखड़ने का डर, करोड़ों के नुकसान की आशंका
स्थानीय लोगों को आशंका है कि अगर इसी तरह निर्माण जारी रहा तो सड़क कुछ ही महीनों में खराब हो जाएगी। इससे न केवल आम जनता को परेशानी होगी, बल्कि सरकारी धन की भी भारी बर्बादी होगी।

अब प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी नजरें
यह मामला सिर्फ एक सड़क तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर कब तक सख्त कदम उठाता है या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाता है।

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